एलजीबीटीक्यू+ समुदाय ने मांगी भेदभावमुक्त स्वास्थ्य सेवा

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एलजीबीटीक्यू+ समुदाय ने मांगी भेदभावमुक्त स्वास्थ्य सेवा

लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक समुदाय ने स्वास्थ्य सेवाओं में भेदभाव, असहज माहौल और नीतियों की अस्पष्टता खत्म करने की मांग सरकार के सामने रखी है। समुदाय से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता से मुलाकात कर स्वास्थ्य अधिकारों और उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।

इस मुलाकात में मायाको पहचान नेपाल, समावेशी मंच और लिड नेपाल के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था अब भी समुदाय की अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त संवेदनशील नहीं बन पाई है।

हॉर्मोन थेरेपी और जेंडर-अफर्मिंग इलाज पर उठे सवाल

बैठक में हॉर्मोन थेरेपी, लैंगिक पहचान के अनुरूप सर्जरी और समुदाय के लिए अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता प्रमुख मुद्दों में रही। प्रतिनिधियों का कहना था कि सिर्फ इलाज की सुविधा बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार से लेकर उपचार संबंधी तकनीकी व्यवस्थाओं तक सुधार की जरूरत है।

मायाको पहचान नेपाल के संस्थापक सुनिल बाबु पंत सहित समुदाय के कई प्रतिनिधियों ने सुरक्षित और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की मांग रखी।

सरकार ने सुधार का दिया भरोसा

मंत्री निशा मेहता ने कहा कि किसी भी नागरिक का स्वास्थ्य सेवा पाने का अधिकार उसकी लैंगिक पहचान या यौनिकता के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार सभी लोगों को सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण और भेदभाव रहित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक समुदाय की विशेष स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय नीतिगत और तकनीकी दोनों स्तरों पर सकारात्मक पहल के लिए तैयार है। इसके लिए संबंधित सरकारी निकायों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरोकार रखने वाले संगठनों के साथ मिलकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रतिबद्धता को जमीन पर उतारने की मांग

समुदाय के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपील की कि घोषणाओं और आश्वासनों को जल्द व्यावहारिक कदमों में बदला जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित माहौल, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और स्पष्ट उपचार दिशानिर्देश उपलब्ध कराए बिना समान स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित नहीं हो पाएंगे।

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