नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन के भत्तों पर उठे बड़े सवाल

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नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन लंबे समय से खुद को घाटे में चलने वाली सार्वजनिक संस्था बताता रहा है। लेकिन अब कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों और दूसरी सुविधाओं पर होने वाले खर्च ने उसके वित्तीय प्रबंधन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में जब नेपाल में ईंधन की कीमतें दक्षिण एशिया के महंगे देशों में गिनी जाती हैं, यह बहस फिर तेज हो गई है कि आखिर कॉरपोरेशन की आर्थिक स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा।

सार्वजनिक किए गए ताजा वित्तीय विवरण के अनुसार, चालू आर्थिक वर्ष में कर्मचारियों को वेतन के अलावा अलग-अलग मदों में भत्ते देने पर 40 करोड़ 72 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।

घर की रंगाई से लेकर कपड़ों तक अलग-अलग भत्ते

सबसे ज्यादा चर्चा घर की रंगाई-पुताई के लिए दिए जाने वाले भत्ते की हो रही है। व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों को हर साल इस मद में 4,200 से 6,000 रुपये तक दिए जाते हैं। इस पर अकेले करीब 69 लाख 95 हजार रुपये खर्च हुए हैं।

इसके अलावा पदपूर्ति, ठेका प्रक्रिया और दूसरे प्रशासनिक कामों के लिए बनने वाली उपसमितियों की बैठकों पर भी 1 करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक खर्च दर्ज किया गया है।

कॉरपोरेशन कर्मचारियों को साल में दो बार पोशाक भत्ता भी देता है। इस मद में 2 करोड़ 14 लाख 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं।

महंगाई, यात्रा और इलाज पर भी करोड़ों रुपये

महंगाई भत्ते के नाम पर कर्मचारियों में 3 करोड़ 87 लाख रुपये बांटे गए। वहीं यात्रा भत्ते पर 3 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च किए गए।

वित्तीय विवरण में यह भी सामने आया है कि औषधि उपचार भत्ते के रूप में 4 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च हुए। यह सुविधा बीमारी की वास्तविक स्थिति से अलग भी कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाती है।

भ्रमण और प्रोत्साहन भत्तों पर बड़ा खर्च

देश के अलग-अलग डिपो के निरीक्षण से लेकर विदेश यात्रा तक के लिए कर्मचारियों को दैनिक भ्रमण भत्ता दिया जाता है। इस मद में 4 करोड़ 57 लाख 87 हजार 500 रुपये खर्च किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, भ्रमण पर जाने वाले कर्मचारियों को वेतन, सरकारी खर्च पर यात्रा और ईंधन सुविधा मिलने के बावजूद अतिरिक्त दैनिक भत्ता भी दिया जाता है।

कार्य प्रोत्साहन भत्ते पर 3 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च हुए हैं। वहीं चौबीसों घंटे संचालित होने वाले हवाई डिपो में तैनात कर्मचारियों के लिए अलग से करीब 3 करोड़ रुपये के भत्ते का प्रावधान रहा।

सबसे ज्यादा राशि ओवरटाइम पर

भत्तों में सबसे बड़ा खर्च ओवरटाइम भुगतान पर हुआ है। इस मद में करीब 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इसके अलावा संचालक समिति की बैठकों के भत्ते पर 52 लाख रुपये, निगरानी भत्ते पर 38 लाख 40 हजार रुपये, फील्ड भत्ते पर 6 लाख 60 हजार रुपये और दुर्गम क्षेत्र भत्ते पर 55 हजार रुपये खर्च होने का उल्लेख है।

खर्च पर पारदर्शिता की मांग तेज

ये सभी खर्च कर्मचारियों के नियमित वेतन से अलग हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब इतनी बड़ी रकम भत्तों और सुविधाओं पर खर्च हो रही है, तब लगातार घाटे का कारण केवल ईंधन मूल्य समायोजन या अन्य आर्थिक चुनौतियों को बताना कितना उचित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक संस्थान की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सिर्फ आय बढ़ाना काफी नहीं होता। खर्च पर नियंत्रण, कर्मचारी सुविधाओं की समीक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन के मामले में भी इन खर्चों की व्यापक और पारदर्शी समीक्षा की मांग अब और तेज होती दिख रही है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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