कॉकरोच जनता पार्टी और ओगी जनता पार्टी के नाम से चल रही ऑनलाइन भिड़ंत ने भारत की इंटरनेट राजनीति को नया रंग दे दिया है। बेरोजगारी, राजनीतिक निराशा और युवाओं के गुस्से से शुरू हुई यह डिजिटल व्यंग्य राजनीति अब मीम, पैरोडी प्रचार और वैचारिक ट्रोलिंग के बड़े ऑनलाइन खेल में बदलती दिखाई दे रही है। इंस्टाग्राम और एक्स पर दोनों समूहों के समर्थक लगातार पोस्टर, नारे, नकली घोषणापत्र और व्यंग्यात्मक वीडियो साझा कर रहे हैं।
यह पूरा टकराव फिलहाल इंटरनेट तक सीमित है। न चुनाव, न संगठनात्मक ढांचा और न ही जमीन पर कोई राजनीतिक गतिविधि। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसका प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि बड़ी संख्या में युवा इसे “मीम-आधारित राजनीतिक आंदोलन” की तरह देखने लगे हैं।
‘कॉकरोच’ शब्द कैसे बना डिजिटल विरोध का प्रतीक
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत उस ऑनलाइन नाराजगी के बाद तेज हुई, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से जुड़ी कथित टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों से की गई।
यही शब्द बाद में विरोध की भाषा बन गया। कई युवाओं ने अपमान माने जाने वाले इस प्रतीक को ही अपनाकर उसे डिजिटल प्रतिरोध में बदल दिया। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और राजनीतिक व्यवस्था से बढ़ती दूरी महसूस कर रहे युवाओं के बीच यह अभियान तेजी से फैलने लगा।
समर्थकों ने इसे उस मानसिकता के खिलाफ व्यंग्यात्मक जवाब बताया, जिसमें परेशान और नाराज युवाओं को गंभीरता से लेने के बजाय मजाक या बोझ की तरह देखा जाता है।
अब इसी अभियान के जवाब में ओगी जनता पार्टी सामने आई है।
अभिजीत डिपके के पुराने राजनीतिक संबंधों पर सवाल
लोकप्रिय एनिमेटेड शो “ओगी एंड द कॉकरोचेज” से प्रेरित नाम रखने वाली ओगी जनता पार्टी ने शुरुआत में खुद को केवल ट्रोल और व्यंग्य आधारित पेज की तरह पेश किया। लेकिन हाल के पोस्टों में समूह ने सीधे कॉकरोच जनता पार्टी की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
ओजेपी ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके के आम आदमी पार्टी से पुराने संबंधों को मुद्दा बनाया है। समूह सोशल मीडिया पर पुराने पोस्ट और स्क्रीनशॉट साझा कर रहा है, जिनके जरिए यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि यह अभियान पूरी तरह “राजनीतिक रूप से स्वतंत्र” नहीं है।
इन्हीं पोस्टों में 2024 का एक संदेश भी दोबारा वायरल किया जा रहा है, जिसमें डिपके ने बोस्टन रवाना होने से पहले दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का धन्यवाद किया था।
मीम संस्कृति से मुद्दों की राजनीति तक
दोनों पक्षों के बीच लड़ाई अब सिर्फ मजाक और वायरल कंटेंट तक सीमित नहीं रही। बेरोजगारी, युवाओं का गुस्सा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संस्थाओं पर अविश्वास जैसे मुद्दे भी इस डिजिटल व्यंग्य का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
ओगी जनता पार्टी ने हाल ही में छह सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया। इसमें आवारा जानवरों के साथ व्यवहार, पशु हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान जैसी बातें शामिल हैं।
समूह ने नीट पेपर लीक विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि वह खुद को सिर्फ पैरोडी पेज तक सीमित रखने के बजाय बड़े राष्ट्रीय मुद्दों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
मजाक, विरोध या नई डिजिटल राजनीति?
सोशल मीडिया पर दोनों समूहों के समर्थक लगातार नकली चुनाव प्रचार, व्यंग्य भाषण और डिजिटल प्रचार सामग्री साझा कर रहे हैं। कई युवाओं के लिए यह पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से बाहर अपनी नाराजगी व्यक्त करने का नया तरीका बन चुका है।
दूसरी ओर कुछ लोग इसे भारत में बदलती राजनीतिक अभिव्यक्ति का संकेत मान रहे हैं, जहां इंटरनेट संस्कृति, व्यंग्य, हास्य और असंतोष मिलकर नई तरह की डिजिटल सक्रियता पैदा कर रहे हैं।