राइड-शेयरिंग राइडरों की कमाई पर अब 5% वैट लागू

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नेपाल में मोबाइल ऐप से चलने वाली राइड-शेयरिंग सेवाओं के लिए टैक्स को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पठाओ, इनड्राइव जैसी कंपनियों से जुड़े राइडरों को अब अपनी कमाई पर मूल्य अभिवृद्धि कर यानी वैट चुकाना होगा। आंतरिक राजस्व विभाग ने शुक्रवार से यह व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत हर उस ट्रांजैक्शन पर 5 प्रतिशत की दर से वैट लगेगा, जो इन प्लेटफॉर्मों के जरिए राइडर करते हैं।

यह बदलाव आर्थिक अधिनियम 2083 में हुए संशोधन के बाद आया है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों को लेकर टैक्स के नियम लंबे समय से साफ नहीं थे, इसी उलझन को खत्म करने के लिए सरकार ने इन्हें औपचारिक कर ढांचे के दायरे में लाने का फैसला किया।

कर वसूलने की जिम्मेदारी किसकी

यहां एक अहम बात समझनी जरूरी है — वैट वसूलने का काम सीधे राइडर का नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म कंपनी का होगा। जैसे ही कोई ट्रांजैक्शन होगा, कंपनी राइडर की कमाई से 5 प्रतिशत रकम काट लेगी। इस कटौती का पूरा हिसाब हर महीने की 25 तारीख तक संबंधित राजस्व कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा। साथ ही हर लेनदेन पर टैक्स इनवॉइस जारी करना भी कंपनियों के लिए जरूरी कर दिया गया है।

विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि राइडर से वसूली गई यह रकम और उससे जुड़ा इनवॉइस, कंपनी की अपनी कमाई नहीं मानी जाएगी। यानी यह पैसा सिर्फ कंपनी के हाथ से होकर गुजरेगा, उसकी आमदनी का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके अलावा इस टैक्स वसूली पर कंपनियों को किसी तरह की कर कटौती की सुविधा भी नहीं मिलेगी।

दो तरह का टैक्स ढांचा

कंपनियां जो कमीशन या सर्विस चार्ज राइडरों से लेती हैं, उस पर पहले जैसी 13 प्रतिशत वैट दर लागू रहेगी। यानी अब इस सेक्टर में दो स्तर पर टैक्स लगेगा — राइडर के हर ट्रांजैक्शन पर 5 प्रतिशत, और कंपनी के कमीशन पर 13 प्रतिशत।

राइडरों के लिए पैन जरूरी

नए नियम के तहत अब कोई भी व्यक्ति जो इन प्लेटफॉर्मों के जरिए सेवा देना चाहता है, उसके पास स्थायी लेखा नंबर यानी पैन होना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि राइडरों को खुद वैट में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, यह जिम्मेदारी कंपनी की ही रहेगी।

आगे क्या

सरकार का यह कदम राइड-शेयरिंग सेक्टर को औपचारिक टैक्स सिस्टम में लाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्मों की कमाई में पारदर्शिता आएगी और सरकार को राजस्व भी सुनिश्चित होगा। लेकिन इसका असर राइडरों की जेब पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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