शेर बहादुर देउबा की नेपाल वापसी: काठमांडू एयरपोर्ट पर फूल या हथकड़ी?

Hindi News Desk
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शेर बहादुर देउबा की नेपाल वापसी: काठमांडू एयरपोर्ट पर फूल या हथकड़ी?

नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा साउन 28 गते वापस काठमांडू लौट रहे हैं। थाई एयरवेज की फ्लाइट से वे दोपहर करीब साढ़े 12 बजे त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचेंगे। उनके समर्थक और नेता उनके स्वागत की तैयारी में जुटे हैं।

पहले उनकी वापसी साउन 26 गते रात में तय थी, लेकिन समर्थकों के अनुरोध पर तारीख और समय बदल दिया गया, क्योंकि रात में हवाईअड्डे पर स्वागत करना मुश्किल होता।

देउवा की वापसी की खबर के साथ ही राजनीतिक हलकों में एक सवाल जोरों से उठ रहा है — हवाईअड्डे पर उतरते ही उनके हाथ में कार्यकर्ताओं का फूलों का गुलदस्ता होगा, या पुलिस की हथकड़ी?

क्या हवाईअड्डे पर गिरफ्तार हो सकते हैं देउवा?

देउवा दंपती के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग यानी संपत्ति शुद्धिकरण से जुड़े मामले में काठमांडू जिला अदालत ने पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। लेकिन बाद में यह मामला विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार में चला गया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत का वह वारंट अपने आप निष्क्रिय हो जाने का फैसला सुनाया।

मतलब साफ है — पुराने वारंट के आधार पर अभी देउवा दंपती को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हालांकि जांच एजेंसी अगर पर्याप्त सबूत के साथ विशेष अदालत से नया वारंट ले आती है, तो गिरफ्तारी की कानूनी गुंजाइश अब भी बनी हुई है।

पुलिस अधिकारियों ने भी अभी तक साफ नहीं बताया कि देउवा के लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा या नहीं। अधिकारी सिर्फ इतना कह रहे हैं कि वे मामले की स्थिति देख रहे हैं। यानी हवाईअड्डे पर गिरफ्तारी होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि साउन 28 गते से पहले कोई नई कानूनी कार्रवाई शुरू होती है या नहीं।

संपत्ति शुद्धिकरण जांच का पूरा मामला क्या है

भदौ 24 गते हुए जेनजी आंदोलन के दौरान बूढानीलकंठ स्थित देउवा के घर में आगजनी हुई थी। इस दौरान देउवा दंपती के साथ मारपीट भी हुई थी।

आग लगने के बाद घर में जले हुए नोटों के टुकड़े मिलने की खबर सामने आई थी। इसके बाद संपत्ति शुद्धिकरण जांच विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जले हुए नोट, राख और जांच के लिए जरूरी अन्य नमूने इकट्ठा किए।

ये नमूने फोरेंसिक लैब भेजे गए थे। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए गए, लेकिन जले हुए पैसे का स्रोत, मात्रा और वैधता को लेकर जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

जांच के दौरान विभाग ने देउवा परिवार के सदस्य को बयान देने के लिए बुलाया था और घर पर नोटिस चस्पा किया था। इसी के आधार पर विभाग के अनुरोध पर काठमांडू जिला अदालत से देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था।

पुराना वारंट निष्क्रिय क्यों हुआ

देउवा दंपती ने जिला अदालत के इस वारंट को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

इसी बीच सरकार ने अध्यादेश के जरिए एक कानूनी बदलाव कर दिया, जिसके तहत संपत्ति शुद्धिकरण विभाग के मामले अब जिला अदालत की बजाय सीधे विशेष अदालत में दर्ज होंगे।

क्षेत्राधिकार विशेष अदालत को मिलते ही सुप्रीम कोर्ट ने काठमांडू जिला अदालत का पुराना वारंट अपने आप निष्क्रिय मान लिया। अदालत के आदेश में यह भी कहा गया कि वारंट मांगते समय कानूनी प्रक्रिया और पहचान से जुड़े विवरण में भी खामियां थीं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह नहीं कि देउवा दंपती जांच से बरी हो गए। आदेश सिर्फ इतना कहता है कि पुराने वारंट के आधार पर गिरफ्तारी नहीं हो सकती। जांच जारी रखने और जरूरत पड़ने पर विशेष अदालत से नया वारंट लेने पर कोई रोक नहीं है।

इंटरपोल से दो बार लौटा अनुरोध

जब देउवा दंपती विदेश में थे, तब नेपाल पुलिस ने इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस जारी कराने की कोशिश की थी।

पहली बार इंटरपोल ने जरूरी दस्तावेज और सबूत अधूरे बताते हुए और जानकारी मांगी थी। नेपाल पुलिस ने अतिरिक्त दस्तावेज भेजे भी, लेकिन इंटरपोल ने फिर कहा कि रेड नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, और अनुरोध वापस कर दिया।

इस तरह विदेश से देउवा दंपती को गिरफ्तार कर नेपाल लाने की सरकारी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। बाद में जब सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत का वारंट भी निष्क्रिय कर दिया, तो रेड नोटिस की पूरी प्रक्रिया का कानूनी आधार और कमजोर हो गया।

पासपोर्ट ठेके में आरजू पर भी जांच की आंच

देउवा परिवार से जुड़ा एक और विवाद है — इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट खरीद और छपाई ठेके का मामला।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग (भ्रष्टाचार विरोधी आयोग) इस ठेके में गड़बड़ी की आशंका पर विस्तृत जांच कर रहा है। इसी सिलसिले में पूर्व विदेश मंत्री आरजू राणा देउवा को भी बयान के लिए बुलाया गया था।

आरजू ने आयोग को ईमेल के जरिए बताया कि वे विदेश में इलाज करा रही हैं, इसलिए तय समय पर पेश नहीं हो सकतीं।

फिलहाल आरजू जांच के दायरे में जरूर हैं, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ है और न ही अदालत में कोई मामला दर्ज हुआ है। जांच चल रही है, इसलिए दोषी या निर्दोष होने का फैसला संबंधित एजेंसी और अदालत ही करेगी।

कांग्रेस की असली कमान किसके पास, फैसला अभी बाकी

नेपाली कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रहा कानूनी विवाद भी अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने वैशाख 4 गते चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए गगन थापा की अगुवाई वाली कार्यसमिति को ही आधिकारिक माना था। लेकिन देउवा गुट ने इस फैसले के खिलाफ पुनरावलोकन याचिका दाखिल की।

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पूर्ण पीठ ने साउन 21 गते इस याचिका पर पुनर्विचार की अनुमति दे दी है। अब इस सवाल पर दोबारा सुनवाई होगी कि चुनाव आयोग ने कार्यसमिति का ब्योरा अपडेट करते समय देउवा गुट को सुनवाई का पूरा मौका दिया था या नहीं।

पुनर्विचार की अनुमति मिलने के बावजूद वैशाख 4 का पुराना फैसला अभी रद्द नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर लागू रोक भी नहीं लगाई। यानी जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक गगन थापा वाली कार्यसमिति ही आधिकारिक कांग्रेस मानी जाएगी।

अब सुप्रीम कोर्ट पुराना फैसला बरकरार रखता है या पलटता है, यह अंतिम सुनवाई के बाद ही साफ होगा। इसी कानूनी खींचतान के बीच देउवा गुट अपनी आगे की राजनीतिक रणनीति बनाने में जुटा है।

28 साउन को हवाईअड्डे पर होंगी सबकी नजरें

देउवा के स्वागत के लिए समर्थक हवाईअड्डे पहुंचने की तैयारी में हैं। दूसरी तरफ उनसे और उनके परिवार से जुड़े संपत्ति शुद्धिकरण और पासपोर्ट ठेके के मामलों की जांच अभी खत्म नहीं हुई है।

फिलहाल सार्वजनिक कानूनी स्थिति के मुताबिक जिला अदालत का पुराना वारंट निष्क्रिय हो चुका है, और विशेष अदालत से कोई नया वारंट जारी होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

इसलिए अभी यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि देउवा को हवाईअड्डे से ही गिरफ्तार किया जाएगा। अगर जांच एजेंसी साउन 28 गते से पहले कोई नई कानूनी कार्रवाई शुरू करती है, तो स्थिति बदल भी सकती है।

अब सबकी नजरें साउन 28 गते त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर टिकी हैं — नेपाल लौटते ही देउवा के हाथ में समर्थकों का फूलों का गुलदस्ता होगा, या राज्य की कोई नई कानूनी कार्रवाई उन्हें पुलिस की हिरासत तक ले जाएगी?

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।