श्रीलंका में पेट्रोल 434 रुपये लीटर, फिर बढ़े ईंधन के दाम

Read this article also in : English

श्रीलंका में एक बार फिर ईंधन महंगा हो गया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल समेत सभी प्रमुख ईंधनों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू कर दी गई हैं। इससे आम लोगों के दैनिक खर्च और परिवहन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

राज्य स्वामित्व वाली Ceylon Petroleum Corporation ने नई कीमतों की घोषणा की। इसके अनुसार 92 ऑक्टेन पेट्रोल 24 श्रीलंकाई रुपये महंगा होकर 434 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं 95 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 25 रुपये बढ़ाकर 495 रुपये प्रति लीटर तय की गई है।

डीजल की बात करें तो ऑटो डीजल 15 रुपये बढ़कर 407 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। सुपर डीजल में 20 रुपये की वृद्धि हुई है और इसकी नई कीमत 478 रुपये प्रति लीटर हो गई है। मिट्टी के तेल की कीमत भी 20 रुपये बढ़ाकर 285 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

नई दरें देशभर के सीपीसी ईंधन स्टेशनों पर लागू होने के तुरंत बाद Lanka IOC और Sinopec Energy Lanka ने भी अपने बिक्री मूल्य उसी के अनुरूप संशोधित कर दिए।

मार्च के बाद पांचवीं बार बढ़ी कीमतें

मार्च से अब तक श्रीलंका में ईंधन कीमतों में पांच बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। इनमें से तीन बार तो मार्च के शुरुआती तीन सप्ताह के भीतर ही दाम बढ़ाए गए थे।

फरवरी के अंत में 92 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 293 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 434 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ ही महीनों में हुई इस तेज वृद्धि ने महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

वैश्विक हालात का असर

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है।

ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर श्रीलंका वैश्विक तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर स्थानीय बाजार तक पहुंचना तय माना जा रहा है।

आईएमएफ कार्यक्रम से भी जुड़ा है फैसला

यह मूल्यवृद्धि ऐसे समय हुई है जब International Monetary Fund ने श्रीलंका के आर्थिक सुधार कार्यक्रम के तहत लगभग 695 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अगली किस्त जारी करने को मंजूरी दी है।

ऊर्जा क्षेत्र को वास्तविक लागत के आधार पर संचालित करना आईएमएफ के साथ हुए समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल माना जाता है। वर्ष 2022 के गंभीर आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका सार्वजनिक वित्त, ऊर्जा प्रबंधन और विदेशी मुद्रा व्यवस्था में कई सुधार लागू कर रहा है।

कमजोर होती मुद्रा बढ़ा रही चुनौती

ईंधन कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ श्रीलंकाई मुद्रा की कमजोरी भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

Central Bank of Sri Lanka के अनुसार मई से स्थानीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है। केंद्रीय बैंक के हालिया आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक श्रीलंकाई रुपये का मूल्य 5 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

मुद्रा के कमजोर होने से तेल आयात की लागत और बढ़ जाती है। ऐसे में आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों को स्थिर रखना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

DISCLAIMER +

यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

Google Add as preferred on Google