सोशल मीडिया पर व्यंग्य और राजनीतिक कटाक्ष के जरिए चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) अब अपने अभियान को जमीन पर ले जाने की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में नागरिक मुद्दों को लेकर संगठित जनअभियान चलाया जाएगा।
दिपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि वह 6 जून को भारत लौटेंगे। इसके बाद नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है कि यह पूरी पहल संवैधानिक दायरे में और अहिंसक तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।
पिछले कुछ समय से सीजेपी शिक्षा नीति को लेकर सरकार की आलोचना कर रही है। इसी सिलसिले में पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। दिपके का दावा है कि इस मांग के समर्थन में चलाए गए ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान में आठ लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह अभियान खासकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कई लोग इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक असंतोष को सामने रखने के नए मंच के रूप में भी देख रहे हैं।
आगे की रणनीति क्या है
सीजेपी का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित रहना नहीं है। संगठन अब जनसरोकार के मुद्दों को लेकर लोगों की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें संगठित रूप से उठाने की दिशा में काम करना चाहता है।
सीजेपी की प्रमुख बातें
- जनता की आवाज को संवैधानिक माध्यमों से उठाने का दावा
- 6 जून के बाद जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी
- ऑनलाइन याचिका में आठ लाख से अधिक हस्ताक्षर जुटने का दावा
- डिजिटल अभियान को व्यापक जनआंदोलन में बदलने की कोशिश
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह अभियान वास्तविक जनसमर्थन को किस हद तक सड़क पर उतार पाता है। साथ ही यह बहस भी तेज हो सकती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बने राजनीतिक समूह क्या लंबे समय तक चलने वाले जनआंदोलनों का रूप ले सकते हैं।