अभिजीत दीपके का दावा, सोनम वांगचुक पर हमले की कोशिश
नीट यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के मामले को लेकर शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन शनिवार को 21वें दिन में पहुंच गया। लगातार खाना नहीं खाने से उनका शरीर काफी कमजोर हो चुका है। डॉक्टरों ने हालात को गंभीर बताते हुए अनशन खत्म करने की सलाह दी है।
इसके बावजूद वांगचुक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की जवाबदेही तय होने और आंदोलन की मांगों पर ठोस कदम उठाए जाने तक दबाव जारी रहेगा।
वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। यहां नीट विवाद को लेकर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। आठ दिन बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।
शुक्रवार को अनशन के 20 दिन पूरे होने पर वांगचुक का एक वीडियो संदेश जारी किया गया। इसमें वह काफी कमजोर दिखाई दिए। उन्होंने स्वीकार किया कि लंबे अनशन के कारण उनका वजन तेजी से घटा है और शरीर की ताकत लगातार कम हो रही है।
वीडियो में वांगचुक ने कहा, “मैं अभी जीवित हूं। मेरे शरीर का करीब 20 फीसदी हिस्सा कम हो चुका है। पहले शरीर में जमा चर्बी खत्म होती है, फिर मांसपेशियां कमजोर होती हैं और उसके बाद अंगों पर असर पड़ने लगता है। लेकिन अभी पीछे हटने का समय नहीं है।”
डॉक्टरों ने अंगों पर असर पड़ने की चेतावनी दी
वांगचुक की जांच कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि इतने लंबे समय तक भोजन न लेने से अब जोखिम बढ़ता जा रहा है। शरीर में जमा चर्बी और मांसपेशियां तेजी से कम होने के बाद दिल, किडनी और दूसरे जरूरी अंग प्रभावित हो सकते हैं।
चिकित्सकों ने उनसे तुरंत अनशन खत्म करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी यही आग्रह किया है।
लेकिन वांगचुक ने कहा है कि वह 20 जुलाई तक खुद को जीवित और आंदोलन में सक्रिय रखने की हर संभव कोशिश करेंगे। इसी दिन ककरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया है।
उन्होंने देशभर के लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। वांगचुक के मुताबिक, 20 जुलाई को जुटने वाली भीड़ ही तय करेगी कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा और सरकार पर इसका कितना असर पड़ेगा।
जंतर-मंतर पर हमले की कोशिश का आरोप
इस बीच सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात जंतर-मंतर पर वांगचुक को निशाना बनाने की कोशिश की गई।
दीपके का दावा है कि कुछ लोगों ने वांगचुक की ओर कोई वस्तु फेंकी थी। वह वस्तु उन्हें नहीं लगी, इसलिए किसी तरह की चोट नहीं आई।
उन्होंने कहा, “सोनम सर पर हमला करने की कोशिश हुई। उनकी तरफ एक वस्तु फेंकी गई, लेकिन संयोग से वह उन्हें नहीं लगी।”
दीपके ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शनस्थल पर बार-बार माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं कर रही।
उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और इसे बाधित करने की कोशिश हो रही है। वांगचुक की सुरक्षा से जुड़ी कोई घटना होने पर सरकार जिम्मेदार होगी।
हालांकि हमले की कोशिश के इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की ओर से भी घटना पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
पुलिस निगरानी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की कथित पुलिस निगरानी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। अदालत इस मामले पर सोमवार, 20 जुलाई को सुनवाई करेगी।
यह याचिका जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनस्थल पर स्थायी निगरानी टावर लगाया गया है और वहां आने वाले लोगों की लगातार तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे हैं।
याचिका में इस निगरानी को जरूरत से ज्यादा और नागरिकों के अधिकारों में दखल देने वाला बताया गया है। सवाल उठाया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों की लगातार रिकॉर्डिंग उनकी निजता, अभिव्यक्ति की आजादी और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
वांगचुक की बिगड़ती सेहत, प्रदर्शनस्थल की सुरक्षा और पुलिस निगरानी के आरोपों के बीच अब सबकी नजर 20 जुलाई के संसद मार्च पर है। विपक्षी दलों से जुड़े कई लोगों और फिल्म जगत की कुछ हस्तियों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
फिलहाल आंदोलन की राजनीतिक मांगों से ज्यादा चिंता वांगचुक की जान को लेकर है। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं, समर्थक अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वांगचुक अपनी मांगों पर डटे हुए हैं।
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