होर्मुज ठप, अमेरिका-ईरान जंग का असर एशिया तक
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार छठी रात भी जारी रहा। दक्षिणी ईरान के तटीय इलाकों पर अमेरिकी हमले तेज हुए हैं, जबकि ईरान ने बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है।
इस लड़ाई का असर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इससे एशिया के कई देशों पर ऊर्जा संकट और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर करने के लिए गुरुवार को भी हवाई हमले किए गए। इससे एक दिन पहले बुधवार को दो बड़े चरणों में कार्रवाई हुई थी। पिछले महीने बनी अस्थायी सहमति के बाद यह पहली बार था जब एक ही दिन इतने बड़े पैमाने पर हमले हुए।
अधिकतर हमले ईरान के दक्षिणी तट और रणनीतिक बंदरगाहों के आसपास किए गए।
बंदर अब्बास और केश्म के पास हमले
ईरानी मीडिया ने गुरुवार शाम होर्मुज के पास केश्म द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास अमेरिकी हमलों की खबर दी।
बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह है। यहां नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े कई अहम ठिकाने भी मौजूद हैं। इसलिए इस इलाके पर हमला सैन्य और आर्थिक, दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में बिजली व्यवस्था, पुल और रेलवे स्टेशन जैसी नागरिक सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।
बंदर खमीर इलाके में तीन पुलों और एक रेलवे स्टेशन को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। दक्षिण-पूर्वी ईरान के ईरानशहर हवाई अड्डे पर भी हमला होने का दावा किया गया है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बहरीन और जॉर्डन के अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर खड़े विमानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
तेहरान का कहना है कि जॉर्डन में हाल ही में बढ़ाए गए एक अमेरिकी हवाई ठिकाने पर भी बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई। ईरान का आरोप है कि इसी ठिकाने का इस्तेमाल उसके खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में किया जा रहा था।
कुवैत की सेना ने भी कहा है कि उसके हवाई क्षेत्र और जमीन की ओर बढ़ रहे मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कार्रवाई की जा रही है।
इससे साफ है कि तनाव अब अमेरिका और ईरान के बीच की सीधी लड़ाई भर नहीं रह गया। खाड़ी के दूसरे देशों की सुरक्षा व्यवस्था भी दबाव में आ गई है।
कतर ने गुरुवार रात कुछ समय के लिए लोगों से घरों या सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की थी। बाद में गृह मंत्रालय ने खतरा टलने और हालात सामान्य होने की जानकारी दी। हालांकि लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करते रहने को कहा गया है।
होर्मुज पर ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि गल्फ ऑफ ओमान में एक जहाज पर अमेरिकी सैनिक चढ़े हैं। अमेरिका इसे ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू करने की कार्रवाई बता रहा है।
ईरान ने बुधवार से होर्मुज में रोक और सख्त कर दी है। अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर शुरू कर दी।
इसके बाद तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बड़े स्तर पर रुक गई है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके ऊर्जा केंद्रों, पुलों और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर हमले बढ़े तो वह पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना सकता है।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस संकेत के बाद आया, जिसमें उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की बात कही थी।
ऊर्जा संकट का सबसे ज्यादा असर एशिया पर
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि होर्मुज से तेल की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा गंभीर संकट में पड़ सकती है।
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में बिरोल ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में हालात नहीं सुधरे तो स्थिति और चिंताजनक हो जाएगी।
युद्ध से पहले दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता था।
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज अधिकतर समय बाधित रहा है। इससे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
लेकिन इसका सबसे बड़ा असर एशिया पर पड़ रहा है।
बिरोल के मुताबिक, होर्मुज से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा एशियाई बाजारों तक जाता था। जापान और दक्षिण कोरिया भी प्रभावित हैं, लेकिन भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा बोझ पड़ सकता है।
तेल और गैस महंगी होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक नहीं रहेगा।
इससे परिवहन, बिजली, उद्योग, खाद्य उत्पादन और रोजमर्रा के सामान की लागत बढ़ सकती है। पेट्रोलियम आयात पर निर्भर देशों में महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास धीमा पड़ने का खतरा भी है।
कमजोर पड़ती शांति की उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने बनी शुरुआती सहमति से लंबे संघर्ष के रुकने की उम्मीद जगी थी। लेकिन पिछले एक हफ्ते में हुए लगातार हमलों ने उस समझदारी को लगभग बेअसर कर दिया है।
चार महीने चली लड़ाई के बाद दोनों पक्षों ने कुछ समय के लिए संयम दिखाया था। अब सैन्य कार्रवाई का दायरा और तीव्रता फिर बढ़ गई है।
फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद पैदा हुआ यह संघर्ष एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है।
इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ईरान में बंद अमेरिकी नागरिक डेना करारी को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने इसे तेहरान का सकारात्मक कदम बताया।
लेकिन ईरान की न्यायपालिका ने किसी अमेरिकी कैदी की रिहाई या अदला-बदली से इनकार किया है।
जमीन पर हमले जारी हैं। समुद्र में नाकाबंदी है। दोनों देशों के राजनीतिक बयान भी एक-दूसरे से टकरा रहे हैं।
ऐसे में बातचीत की गुंजाइश और कम होती जा रही है। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो इसकी कीमत युद्ध क्षेत्र से बहुत दूर बैठे देशों और आम लोगों को भी चुकानी पड़ेगी।
DISCLAIMER
यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।