अमेरिका में घड़ी बदलने की प्रथा खत्म करने का बिल पास

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अमेरिका में साल में दो बार घड़ी आगे-पीछे करने की पुरानी व्यवस्था खत्म करने की कोशिश एक बार फिर आगे बढ़ी है। प्रतिनिधि सभा ने ‘सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट’ को 308 के मुकाबले 117 वोट से मंजूरी दे दी।

इस विधेयक को डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिला। अब इसे सीनेट में भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंचेगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस बदलाव के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि हर साल दो बार घड़ी बदलना लोगों और कारोबारों के लिए बेवजह की परेशानी और खर्च है। ट्रंप ने विधेयक को कानून बनाने के लिए समर्थन देने की बात कही है।

कानून बना तो क्या बदलेगा?

अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में अभी मार्च से नवंबर तक डेलाइट सेविंग टाइम लागू रहता है। वसंत में घड़ी एक घंटा आगे कर दी जाती है और शरद ऋतु में फिर एक घंटा पीछे कर दी जाती है।

नया कानून लागू हुआ तो यही डेलाइट सेविंग टाइम पूरे साल बना रहेगा। लोगों को मार्च और नवंबर में घड़ियां दोबारा सेट नहीं करनी पड़ेंगी।

हालांकि हर राज्य के लिए इस व्यवस्था को अपनाना जरूरी नहीं होगा। कानून लागू होने से पहले कोई राज्य चाहे तो स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम से बाहर रह सकता है और पूरे साल सामान्य समय पर चलने का फैसला कर सकता है।

यही बात इस बहस को थोड़ा पेचीदा बनाती है। घड़ी बदलना बंद करने पर काफी सहमति है, लेकिन पूरे साल कौन-सा समय रखा जाए, इस पर अमेरिका अब भी बंटा हुआ है।

लोग घड़ी बदलने से परेशान, पर विकल्प साफ नहीं

अमेरिका में कई सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में लोग साल में दो बार समय बदलने की व्यवस्था से खुश नहीं हैं। बच्चों के स्कूल, दफ्तर, उड़ानों, बस सेवाओं और रोजमर्रा की दिनचर्या पर इसका सीधा असर पड़ता है।

समय बदलने के बाद कई लोगों की नींद का चक्र कुछ दिनों तक बिगड़ा रहता है। सुबह उठने, काम पर जाने और बच्चों को स्कूल भेजने का समय अचानक बदल जाता है। समर्थकों का तर्क है कि यह परेशानी अब खत्म होनी चाहिए।

लेकिन सवाल यह है कि स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम रखा जाए या सामान्य समय।

न्यूयॉर्क के बफेलो इलाके से रिपब्लिकन सांसद निक लैंगवर्थी ने कहा कि वह विधेयक के हर पहलू पर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। फिर भी मतदाताओं का संदेश साफ है—वे बार-बार घड़ी नहीं बदलना चाहते।

यह मुद्दा केवल पार्टी की राजनीति तक सीमित नहीं है। किसान, शिक्षक, अभिभावक, मनोरंजन उद्योग, गोल्फ कारोबार और दूसरे समूह अपनी जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग राय रखते हैं।

शाम को ज्यादा रोशनी, सुबह बढ़ेगा अंधेरा

डेलाइट सेविंग टाइम का मकसद गर्म और लंबे दिनों में शाम की प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा इस्तेमाल करना है। इसके समर्थक मानते हैं कि देर तक उजाला रहने से लोग बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, बाजारों में गतिविधि बढ़ती है और कुछ मामलों में ऊर्जा की खपत भी कम हो सकती है।

व्यापार और मनोरंजन से जुड़े समूह इस व्यवस्था के बड़े समर्थक रहे हैं। उनका मानना है कि शाम का अतिरिक्त उजाला दुकानों, रेस्तरां, खेल और दूसरी बाहरी गतिविधियों के लिए फायदेमंद होता है।

दूसरी तरफ चिंता सर्दियों की सुबह को लेकर है।

अगर डेलाइट सेविंग टाइम पूरे साल लागू रहा तो कई उत्तरी राज्यों में सर्दियों के दौरान सूरज बहुत देर से निकलेगा। कुछ इलाकों में सुबह 9 बजे के बाद तक अंधेरा रह सकता है।

इसका सबसे सीधा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ सकता है। उन्हें सूर्योदय से पहले घर से निकलना होगा। सुबह जल्दी काम शुरू करने वाले मजदूरों और किसानों के लिए भी मुश्किल बढ़ सकती है।

रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन लंबे समय से इसी आधार पर स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को अंधेरे में स्कूल भेजना सुरक्षित विकल्प नहीं है।

कुछ सांसद सामान्य समय के पक्ष में

प्रतिनिधि सभा में कई सांसद ऐसे भी हैं जो घड़ी बदलने की व्यवस्था खत्म करना चाहते हैं, लेकिन पूरे साल डेलाइट सेविंग टाइम रखने के पक्ष में नहीं हैं।

डेमोक्रेट सांसद मैरी गे स्कैनलन का कहना है कि किसी स्थायी बदलाव का फैसला करते समय बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सुबह की दिनचर्या को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से इस बात पर बहस करते रहे हैं कि शरीर की प्राकृतिक घड़ी के लिए कौन-सा समय बेहतर है। समय में अचानक बदलाव से नींद, एकाग्रता और दैनिक व्यवहार प्रभावित हो सकते हैं।

डेमोक्रेट सांसद फ्रैंक पैलोन ने कहा कि यह सवाल अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि अमेरिका अभी भी घड़ी क्यों बदल रहा है। उनके मुताबिक इसके स्वास्थ्य और सामाजिक असर पर पर्याप्त अध्ययन हो चुके हैं, इसलिए पुरानी व्यवस्था को जारी रखने की वजह पर दोबारा विचार होना चाहिए।

इन राज्यों और क्षेत्रों में पहले से नहीं बदलती घड़ी

अमेरिका के सभी हिस्से डेलाइट सेविंग टाइम का पालन नहीं करते।

हवाई और एरिजोना के ज्यादातर इलाकों में पूरे साल सामान्य समय ही रहता है। हालांकि एरिजोना के भीतर आने वाला नवाहो नेशन डेलाइट सेविंग टाइम लागू करता है।

प्यूर्टो रिको, अमेरिकी वर्जिन द्वीप, गुआम, अमेरिकन समोआ और नॉर्दर्न मारियाना द्वीप समूह में भी घड़ियां आगे-पीछे नहीं की जातीं।

अमेरिका के 19 राज्य पहले ही ऐसे कानून पारित कर चुके हैं, जिनमें संघीय अनुमति मिलने पर स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम अपनाने का प्रावधान है। नया संघीय कानून बनने पर इन राज्यों के लिए अपनी व्यवस्था लागू करने का रास्ता खुल सकता है।

1974 का प्रयोग ज्यादा समय नहीं चला

अमेरिका में डेलाइट सेविंग टाइम का व्यापक इस्तेमाल विश्व युद्धों के दौरान ऊर्जा बचाने के उपाय के रूप में शुरू हुआ था। 1966 के ‘यूनिफॉर्म टाइम एक्ट’ ने देशभर के लिए एक व्यवस्था तय की, लेकिन राज्यों को इससे बाहर रहने का अधिकार भी दिया गया।

1974 में ऊर्जा संकट के दौरान अमेरिका ने पूरे साल डेलाइट सेविंग टाइम लागू किया था। शुरुआत में इस फैसले को समर्थन मिला, लेकिन सर्दियों की अंधेरी सुबह को लेकर लोगों की नाराजगी तेजी से बढ़ी।

कुछ ही समय में कांग्रेस को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

आज के विरोधी उसी अनुभव का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि शाम को ज्यादा उजाला आकर्षक लग सकता है, लेकिन सर्दियों की सुबह का असर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सीनेट में फिर अटक सकता है मामला

स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम का प्रस्ताव पहले भी कांग्रेस तक पहुंच चुका है। 2022 में सीनेट ने ऐसे ही एक विधेयक को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी, लेकिन प्रतिनिधि सभा में उस पर मतदान नहीं हो सका।

2025 में भी सीनेट में कोशिश हुई, मगर सहमति नहीं बन पाई।

इस बार तस्वीर उलटी है। प्रतिनिधि सभा ने साफ बहुमत से विधेयक पारित कर दिया है, लेकिन सीनेट में इसका रास्ता आसान नहीं माना जा रहा।

घड़ी बदलना बंद किया जाए, इस बात पर सांसद एक-दूसरे के करीब दिखते हैं। असली विवाद अब भी वही है—अमेरिका की घड़ी पूरे साल शाम की रोशनी के हिसाब से चले या सुबह के सूरज के।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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