होर्मुज पर अमेरिका-ईरान भिड़ंत, तेल सप्लाई पर खतरा

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अमेरिका और ईरान एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में उतर आए हैं। इस बार विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

एक व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में तेहरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन भेजने का दावा किया है।

इस टकराव ने कुछ सप्ताह पहले शुरू हुई अस्थायी शांति को लगभग बेअसर कर दिया है। समुद्री रास्ता खुला है या बंद, इस पर भी दोनों देशों के बयान अलग-अलग हैं। जहाजों की आवाजाही जारी जरूर है, लेकिन पहले के मुकाबले बहुत कम हो गई है।

व्यापारिक जहाज पर हमला बना नई लड़ाई की वजह

ओमान के अधिकारियों के मुताबिक साइप्रस के झंडे वाला कंटेनर जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले का शिकार हुआ। इसके बाद जहाज में आग लग गई।

हादसे के समय संकट का संकेत भेजा गया था। बचाव दल ने कम से कम 23 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला। चालक दल का एक भारतीय सदस्य अब भी लापता बताया गया है।

ईरान का कहना है कि जहाज उसके तय और स्वीकृत समुद्री रास्ते से बाहर चला गया था। इसी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

अमेरिका ने इस दलील को खारिज किया है। वाशिंगटन इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज पर सीधा हमला बता रहा है।

यही घटना अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की तात्कालिक वजह बनी। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने पिछले एक सप्ताह में इसी तरह की घटनाओं के जवाब में ईरान पर तीन चरणों में हवाई हमले किए हैं।

ईरान के 140 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर प्रहार

अमेरिकी सेना की मध्य कमान, सेंटकॉम के अनुसार शनिवार रात से रविवार सुबह तक ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग ठिकानों, हथियार भंडारों, संचार प्रणालियों और दूसरी सैन्य सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए।

अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई का मकसद ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही को खतरा हो सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर “बहुत कड़ा” हमला किया गया है। एनबीसी के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने दावा किया कि दोनों देश समझौते के करीब थे, लेकिन व्यापारिक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका को जवाब देना पड़ा।

ईरान ने किसी नए समझौते के करीब पहुंचने वाली बात स्वीकार नहीं की है।

रातभर ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में विस्फोट सुने जाने की खबरें भी आईं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक बंदर अब्बास, सिरिक, चाबहार, जास्क, असालुयेह, बंदर-ए-देर और बुशहर के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया।

इन क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों के साथ कई महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान भी हैं। ईरानी मीडिया ने एक नौसेना अधिकारी की मौत की जानकारी दी है, लेकिन नुकसान का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है।

खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाब

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जोर्डन, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचों को निशाना बनाने का दावा किया।

संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि उसकी हवाई सीमा की ओर आए मिसाइल और ड्रोन रोक दिए गए। कुवैत ने भी अपनी दिशा में हथियार आने की सूचना दी है।

कतर में एक ईरानी ड्रोन को रोकने के दौरान एक बच्चे समेत तीन लोगों के घायल होने की खबर है। ओमान और जोर्डन ने भी अपने क्षेत्रों के आसपास हमले या संदिग्ध उड़ान गतिविधियां देखे जाने की बात कही है।

सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार ईरानी हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक को गंभीर चोट नहीं लगी। किसी बड़े सैन्य नुकसान की भी सूचना नहीं है।

ईरानी संसद के अध्यक्ष और वार्ता में शामिल प्रमुख नेता मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने कहा कि एकतरफा समझौतों का समय खत्म हो चुका है। उनका कहना है कि अमेरिका ने अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं की तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।

होर्मुज खुला है या बंद, दावे बिल्कुल अलग

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य को “अगली सूचना तक बंद” रखने की घोषणा की है। तेहरान का कहना है कि शांति लौटने तक जहाजों की सामान्य आवाजाही संभव नहीं होगी।

ईरान ने यह भी साफ किया है कि जहाजों को उसके क्षेत्रीय जल से गुजरते समय उसी रास्ते का इस्तेमाल करना होगा, जिसे उसने मंजूरी दी है। रास्ता बदलने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

अमेरिका जलडमरूमध्य बंद होने के दावे को गलत बता रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना दोनों का कहना है कि यह समुद्री मार्ग अब भी चालू है।

सेंटकॉम के मुताबिक अमेरिकी सेना अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बनाए रखने के लिए तैयार है। अमेरिका का दावा है कि पिछले सात दिनों में 140 से अधिक जहाज होर्मुज से गुजर चुके हैं।

बहुराष्ट्रीय समुद्री निगरानी व्यवस्था ने भी ओमान और ईरान, दोनों तरफ के रास्तों पर जहाज चलने की पुष्टि की है। हालांकि संख्या सामान्य दिनों की तुलना में बहुत कम है।

टकराव शुरू होने से पहले करीब 140 जहाज हर दिन इस रास्ते से गुजरते थे। अब लगभग उतनी ही संख्या पूरे सप्ताह में दर्ज की जा रही है।

यानी जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है।

अंतरिम समझौता टूटने के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को 60 दिनों के लिए अंतरिम समझ बनने की बात कही गई थी। इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होनी थी।

अब समझौते की अवधि आधी भी पूरी नहीं हुई और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं।

ट्रंप ने सप्ताहांत में दावा किया था कि बातचीत अंतिम समझौते के करीब पहुंच रही है। इसके कुछ समय बाद ही व्यापारिक जहाज पर हमला हुआ और फिर अमेरिका ने ईरान के भीतर बड़ी सैन्य कार्रवाई कर दी।

तेहरान ने नए समझौते की पुष्टि नहीं की है। उसने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले जारी रहे तो खाड़ी क्षेत्र के दूसरे सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा।

वाशिंगटन का रुख भी सख्त है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि ईरान की ओर से जहाजों या सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहे तो उसकी कार्रवाई नहीं रुकेगी।

तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच सार्वजनिक धमकियां भी तेज हो गई हैं।

मोजतबा खामेनी ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनी की मौत का बदला लेने की बात कही है। ईरान अली खामेनी की मौत को युद्ध के शुरुआती दिनों में हुए अमेरिकी-इजरायली हमले से जोड़ता है।

तेल और गैस की सप्लाई पर बढ़ा खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच का सैन्य मुद्दा नहीं है। दुनिया में समुद्र के रास्ते कारोबार होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता रहा है।

जहाजों की संख्या घटने से ऊर्जा बाजार में कीमतें फिर बढ़ने का दबाव बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट पिछले सप्ताह करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह युद्ध से पहले के स्तर के मुकाबले लगभग पांच प्रतिशत अधिक है।

तनाव अपने चरम पर पहुंचने के दौरान तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की जानकारी भी सामने आई थी। अभी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाले दिनों में तेल और गैस ले जाने वाले बड़े जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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