उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से पहाड़ी जिलों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। जगह-जगह पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिर रहे हैं। कई सड़कें बंद या क्षतिग्रस्त हैं। अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है।
नदियों के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि खराब मौसम के बीच नदी तट, पुल और तेज बहाव वाले इलाकों में जाना जोखिम भरा हो सकता है।
रुद्रप्रयाग में स्कूल बंद
लगातार बारिश को देखते हुए रुद्रप्रयाग जिले में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कई जगह रास्तों की हालत ठीक नहीं है और बच्चों का स्कूल तक पहुंचना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
पहाड़ी इलाकों में छोटे रास्तों और संपर्क मार्गों पर भी मलबा आने की खबरें हैं। ऐसे में स्कूलों को बंद रखने का निर्देश एहतियात के तौर पर दिया गया है।
बारिश का सबसे ज्यादा असर सड़क यातायात पर दिख रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क धंसने की घटनाओं के कारण राज्य में 107 सड़कें और यातायात मार्ग प्रभावित हुए हैं।
कई पहाड़ी रास्तों पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी है। प्रशासन ने लोगों से मौसम और सड़क की ताजा स्थिति जानने के बाद ही यात्रा शुरू करने को कहा है। खासकर रात के समय और तेज बारिश के बीच पहाड़ी सड़कों पर सफर न करने की सलाह दी गई है।
तीन जिलों में रेड अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने मेघगर्जन, बिजली गिरने और कम समय में तेज बारिश की भी आशंका जताई है। अचानक तेज पानी गिरने से शहरों के निचले हिस्सों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।
प्रशासन ने इन जिलों में रहने वाले लोगों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और स्थानीय स्तर पर जारी होने वाली चेतावनियों पर ध्यान देने की अपील की है।
कई जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के बड़े हिस्से में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी भी दी है। अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी को संवेदनशील जिलों में रखा गया है।
कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने पर छोटे नाले और बरसाती धाराएं अचानक उफान पर आ सकती हैं। नदी, नाले, खड्ड और पानी के प्राकृतिक रास्तों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा ज्यादा है।
पहाड़ी ढलानों के नीचे बने घरों और सड़कों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। कई जगह जमीन पहले से पानी से भरी हुई है। ऐसे में थोड़ी और तेज बारिश भी पहाड़ खिसकने की वजह बन सकती है।
अलकनंदा और मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा
अलकनंदा और मंदाकिनी नदी में पानी लगातार बढ़ रहा है। कुछ जगहों पर नदी का बहाव किनारों तक पहुंच गया है और पानी आसपास के निचले हिस्सों की ओर फैलने लगा है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे न जाने को कहा है। पुलों पर रुककर पानी देखने, तस्वीरें लेने या तेज बहाव के पास जाने से भी बचने की अपील की गई है।
नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरी सामान तैयार रखने को कहा गया है। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें सुरक्षित जगहों पर भेजा जा सकता है।
संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। प्रशासन भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदी कटाव वाले इलाकों की निगरानी कर रहा है।
लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और मौसम विभाग, जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने को कहा गया है।