होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हो गई। छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक घायल हैं। चार घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
हमला मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को ओमान की समुद्री सीमा में हुआ। दोनों जहाज संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े हैं और जलडमरूमध्य के दक्षिणी रास्ते से गुजर रहे थे।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहियाह’ नाम के टैंकरों को ईरानी क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया। ईरान की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मारे गए भारतीय नागरिक मोम्बासा टैंकर पर काम कर रहे थे। हमले के बाद जहाज पर मौजूद लोगों को निकालने और घायलों को चिकित्सा सहायता देने का अभियान चलाया गया।
दोनों जहाजों में लगी आग
मिसाइल लगने के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई। जहाजों के कुछ हिस्सों को नुकसान भी पहुंचा है।
यूएई के मुताबिक, बचाव और अग्निशमन दलों ने आग पर काबू पा लिया है। घायलों का इलाज जारी है। गंभीर रूप से घायल चार लोगों की स्थिति पर डॉक्टर नजर रख रहे हैं।
यह हमला ऐसे समुद्री रास्ते पर हुआ है जहां से रोज बड़ी संख्या में तेल और गैस ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। इस वजह से घटना का असर केवल यूएई या ओमान तक सीमित नहीं माना जा रहा।
यूएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि देश अपने नागरिकों, वहां रहने वाले लोगों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है।
सुरक्षा एजेंसियों को भी अधिक सतर्क रहने को कहा गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि देश की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने की किसी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हमला
टैंकरों पर हमला उस समय हुआ है जब होर्मुज क्षेत्र को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने ईरान के खिलाफ नए चरण की सैन्य कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की थी। इसके कुछ समय बाद ही टैंकरों पर हमले की जानकारी सामने आई।
अमेरिकी सेना का कहना है कि उसकी कार्रवाई का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में नागरिक तथा व्यावसायिक जहाजों पर हमले रोकना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। उनका दावा है कि अमेरिका ईरान की हमला करने की क्षमता घटाने और जलडमरूमध्य पर फिर नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर रहा है।
इन बयानों के बाद क्षेत्र में सीधे सैन्य टकराव का खतरा और बढ़ गया है। अब ओमान की समुद्री सीमा के भीतर टैंकरों को निशाना बनाए जाने से पड़ोसी देशों की चिंता भी बढ़ सकती है।
तेल की कीमत में तेज उछाल
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। सामान्य दिनों में वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है।
हमले की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 7.8 प्रतिशत बढ़कर 81.92 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
यह कीमत युद्ध के सबसे तनावपूर्ण दौर में दर्ज करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कम है। फिर भी बाजार की चिंता साफ दिखाई दे रही है।
जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की आपूर्ति, समुद्री बीमा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम उत्पादों और परिवहन लागत पर पड़ने की आशंका है।
ओमानी समुद्री क्षेत्र में हुआ यह हमला, एक चालक दल सदस्य की मौत और यूएई की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी—इन तीनों ने होर्मुज में चल रहे तनाव को अब अधिक खतरनाक मोड़ पर ला दिया है।