चितवन के एक होटल में नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुङ को परोसे गए अंडे के ऑमलेट में मछली का कांटा मिलने की घटना पिछले दो दिनों से चर्चा में है। मामले के सामने आने के बाद संबंधित सरकारी निकाय ने होटल का निरीक्षण किया, 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और दो कर्मचारियों से पूछताछ भी की।
लेकिन घटना के बाद जिस बात पर सबसे ज्यादा बहस हो रही है, वह होटल की गलती नहीं बल्कि गृहमंत्री की शिकायत को लेकर है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया।
क्या शिकायत करना गलत था?
कई लोगों का कहना है कि गृहमंत्री होने की वजह से एक सामान्य घटना को बड़ा मुद्दा बना दिया गया। कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि रसोई में ऐसी गलती कभी-कभार हो सकती है।
हालांकि दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर किसी आम ग्राहक को होटल में खाना खाते समय ऑमलेट के भीतर मछली का कांटा मिल जाए तो वह क्या करेगा?
संभावना है कि अधिकांश लोग होटल प्रबंधन से जवाब मांगेंगे, तस्वीर या वीडियो साझा करेंगे या फिर संबंधित निकाय में शिकायत दर्ज कराएंगे। ऐसे में यदि कोई जनप्रतिनिधि या मंत्री भी वही करता है तो उसे अलग नजर से क्यों देखा जा रहा है, इस पर भी बहस हो रही है।
सिर्फ कांटा मिलने पर नहीं हुई कार्रवाई
सोशल मीडिया में यह धारणा भी बनी कि एक कांटा मिलने के कारण होटल पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया गया।
लेकिन सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी इससे कुछ अलग तस्वीर दिखाती है। निरीक्षण के दौरान खाद्य गुणवत्ता, रसोई व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की गई थी। बताया गया कि कुछ कमियां मिलने के बाद कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।
इसी प्रक्रिया के तहत जुर्माना लगाया गया और होटल के दो कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
यही वजह है कि कई लोग इसे केवल ऑमलेट में कांटा मिलने की घटना भर नहीं मान रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल भी सामने ला दिया है।
अगर ऐसे प्रतिष्ठित होटल में, जहां अक्सर प्रभावशाली लोग और बाहरी मेहमान पहुंचते हैं, खाद्य गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ सकते हैं तो छोटे शहरों और कस्बों के होटल-रेस्तरां की स्थिति कैसी होगी?
नेपाल भर में हजारों होटल और भोजनालय संचालित हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है और निरीक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल समय-समय पर सामने आता रहा है।
कई लोगों का मानना है कि इस मामले को केवल राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उपभोक्ता अधिकार और खाद्य सुरक्षा के नजरिए से भी समझना जरूरी है।
आगे की चुनौती क्या है?
घटना चाहे किसी मंत्री से जुड़ी हो या किसी आम नागरिक से, इससे एक संदेश साफ निकलता है कि खाद्य सुरक्षा को केवल शिकायत आने के बाद नहीं बल्कि नियमित रूप से प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
होटलों और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और स्वच्छता मानकों की लगातार निगरानी से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सुदन गुरुङ के समर्थन और विरोध की राजनीति अपनी जगह है। लेकिन सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन हर नागरिक का अधिकार है, इस बात पर शायद सबसे अधिक सहमति दिखाई दे रही है।