बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। देशभर के अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और बच्चों की मौत का आंकड़ा तेजी से ऊपर जा रहा है। पिछले करीब ढाई महीने में ५२८ बच्चों की मौत हो चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक १५ मार्च २०२६ के बाद से खसरा या खसरे जैसे लक्षणों की वजह से ये मौतें दर्ज की गई हैं। सिर्फ पिछले २४ घंटे में ही १६ और बच्चों की जान गई है।
देशभर में अब तक ६३ हजार से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें ८,५०० से ज्यादा संक्रमण लैब जांच में खसरा पाए गए हैं। संक्रमण ५८ जिलों तक फैल चुका है।
सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर दिख रहा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
ढाका डिवीजन की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है। यहां अकेले २२४ बच्चों की मौत हुई है। कई शहरों के अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इलाज व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
पिछले २४ घंटे में १,४३४ नए मामले सामने आए हैं। अब तक ६३,८१३ बच्चों में खसरे जैसे लक्षण मिले हैं। इनमें ५० हजार से ज्यादा बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इलाज के बाद ४६ हजार से ज्यादा बच्चों को छुट्टी भी दी जा चुकी है।
सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ५२८ मौतों में से ४४२ बच्चों में खसरे जैसे लक्षण थे, जबकि ८६ मामलों में लैब जांच के जरिए खसरे की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि टेस्टिंग किट की कमी की वजह से कई मामलों की समय पर जांच नहीं हो पा रही है।
छोटे बच्चों में ज्यादा गंभीर असर
डॉक्टरों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
कई बच्चों में निमोनिया, दिमाग में सूजन और गंभीर सांस संबंधी दिक्कतें देखी जा रही हैं। कुपोषित बच्चों और जिन बच्चों को समय पर टीका नहीं लगा, उनमें खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।
ढाका समेत कई शहरों के अस्पतालों में अलग खसरा वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन ICU बेड की कमी के कारण गंभीर मरीजों का इलाज मुश्किल होता जा रहा है।
सरकार ने तेज किया टीकाकरण अभियान
बांग्लादेश सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए देशभर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक १.८४ करोड़ से ज्यादा बच्चों को खसरे का टीका लगाया जा चुका है। यह सरकार के शुरुआती लक्ष्य से भी ज्यादा है।
यूनिसेफ ने कमजोर टीकाकरण व्यवस्था, बच्चों में कुपोषण और कम स्तनपान दर को संक्रमण तेजी से फैलने की बड़ी वजह बताया है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां भी इस स्थिति को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट मान रही हैं।