कुलमान घिसिङ का सरकार पर सवाल, बिजली पर VAT क्यों?

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नेपाल सरकार के आगामी आर्थिक वर्ष 2083/84 के बजट में 50 यूनिट से अधिक मासिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर 5 प्रतिशत वैट लगाने के फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच उज्यालो नेपाल पार्टी के अध्यक्ष कुलमान घिसिङ ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश में बिजली की खपत बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन सरकार का कदम इसके उलट दिखाई देता है।

घिसिङ ने सामाजिक सञ्जाल के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेपाल में उत्पादित स्वच्छ ऊर्जा का अधिकतम उपयोग देश के भीतर होना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे समय में अतिरिक्त कर लगाना ऊर्जा नीति के दीर्घकालीन लक्ष्य के अनुकूल नहीं है।

विद्युतीकरण को बढ़ावा देने की जरूरत

उनका कहना है कि भारत सहित कई देश स्वच्छ ऊर्जा और विद्युतीकरण को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ अपना रहे हैं। ऐसे समय में नेपाल में बिजली उपयोग को महंगा बनाना उपभोक्ताओं को हतोत्साहित कर सकता है।

घिसिङ के अनुसार ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए घर-घर में बिजली आधारित उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। यदि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया तो इसका असर खपत वृद्धि पर पड़ सकता है।

पूर्वाधार क्षमता को लेकर सरकार के तर्क पर सवाल

सरकार की ओर से यह तर्क सामने आया था कि यदि अधिकांश परिवार इंडक्सन चूल्हा प्रयोग करने लगें तो ट्रान्सफर्मर और सबस्टेसन पर दबाव बढ़ सकता है। इस दलील से घिसिङ सहमत नहीं दिखे।

उन्होंने कहा कि लोडशेडिङ समाप्त होने के बाद देशभर में प्रसारण तथा वितरण प्रणाली के विस्तार पर बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। कई उच्च क्षमता वाले सबस्टेसन और ट्रान्सफर्मर संचालन में हैं, जबकि 132, 220 और 400 केभी प्रसारण लाइनें भी सक्रिय हैं।

उनके अनुसार काठमांडू उपत्यका में वितरण प्रणाली को आधुनिक और भूमिगत बनाने का काम भी लगभग अंतिम चरण में पहुँच चुका है। ऐसे में वर्तमान पूर्वाधार को कमजोर बताकर कर वृद्धि को उचित ठहराना सही नहीं होगा।

बढ़ रही है बिजली आधारित उपकरणों की संख्या

घिसिङ ने कहा कि अब बड़ी संख्या में परिवार इंडक्सन चूल्हा, गीजर, हीटर तथा अन्य विद्युत उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन और चार्जिङ स्टेशन का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।

उनका तर्क है कि पूरा विद्युत भार एक साथ एक ही स्थान पर नहीं पड़ता, इसलिए पूरे सिस्टम के अचानक असफल होने की आशंका को तकनीकी दृष्टि से मजबूत आधार नहीं माना जा सकता।

VAT की रकम कहाँ जाएगी?

घिसिङ ने यह भी कहा कि नए वैट से जुटने वाली रकम नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पास नहीं जाएगी, बल्कि सीधे राज्यकोष में जमा होगी।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को ऊर्जा क्षेत्र में अतिरिक्त निवेश के लिए राजस्व चाहिए तो इस बारे में स्पष्ट जानकारी जनता को दी जानी चाहिए। बिजली पूर्वाधार का हवाला देकर कर का बचाव करना पारदर्शी तरीका नहीं माना जा सकता।

फैसला वापस लेने की अपील

घिसिङ का कहना है कि नेपाल को हरित अर्थव्यवस्था और स्वदेशी ऊर्जा उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसे समय में बिजली उपभोग पर अतिरिक्त कर लगाना दूरदर्शी नीति नहीं माना जा सकता।

उन्होंने सरकार से 50 यूनिट से अधिक बिजली खपत पर लगाए गए 5 प्रतिशत वैट के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। साथ ही सार्वजनिक बहस में तथ्य आधारित दृष्टिकोण अपनाने और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर दिया।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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