रास्वपा के जिला चुनाव पर सवाल, कार्यालय पर लगा ताला

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राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की दैलेख जिला इकाई का पहला जिला अधिवेशन संपन्न होने के बाद संगठन के भीतर नया विवाद खड़ा हो गया है। अध्यक्ष पद के चुनाव में घोषित कुल मतदान और उम्मीदवारों को मिले वोटों की संख्या मेल नहीं खाने पर सवाल उठे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि पार्टी के जिला कार्यालय पर ही ताला लगा दिया गया।

अधिवेशन में नेतृत्व का चयन सर्वसम्मति से नहीं हो सका था, जिसके बाद मतदान कराया गया। चुनाव समिति ने अध्यक्ष पद के लिए कुल 240 वोट पड़ने की जानकारी दी थी। लेकिन अंतिम नतीजों में चारों उम्मीदवारों को मिले मतों का जोड़ 246 निकला, जिससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हो गया।

घोषित परिणाम के अनुसार बखतबहादुर भण्डारी 93 मत लेकर जिला अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उनके प्रतिद्वंद्वी प्रकाश बुढा को 69, बीनीबहादुर शाही को 43 और मित्रराज प्याकुरेल को 41 वोट मिले। इन सभी मतों को जोड़ने पर संख्या 246 पहुंचती है, जो घोषित कुल मतदान से छह अधिक है।

उम्मीदवार ने लगाए गंभीर सवाल

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे प्रकाश बुढा ने मतगणना पर आपत्ति जताते हुए पार्टी कार्यालय में ताला लगा दिया है। उनका कहना है कि चुनाव से जुड़े दस्तावेजों में फेरबदल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए प्रमाण सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।

सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि पार्टी स्तर से स्पष्ट और भरोसेमंद जांच प्रक्रिया शुरू करने की प्रतिबद्धता आती है तो कार्यालय खोलने पर विचार किया जा सकता है।

बुढा ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और सुशासन की बात केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संगठन के भीतर भी उसी भावना के साथ काम होना चाहिए।

चुनाव समिति ने प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष

विवाद के बीच चुनाव समिति ने अपने कामकाज का बचाव किया है। समिति का कहना है कि मतदान से जुड़े सभी दस्तावेज पार्टी कार्यालय को सौंप दिए गए हैं और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न कराई गई थी।

समिति ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार करते हुए कहा कि चुनाव निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से कराया गया था। हालांकि मतों के आंकड़ों में दिख रहे अंतर को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

पार्टी नेतृत्व की ओर टिकी निगाहें

अब इस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी पार्टी के जिला और केंद्रीय नेतृत्व पर आ गई है। स्थानीय स्तर पर उठे सवालों का जवाब और मतों के अंतर की स्पष्ट व्याख्या सामने आने तक दैलेख में रास्वपा के भीतर पैदा हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा।

इस घटनाक्रम ने नवगठित जिला नेतृत्व की वैधता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। पार्टी की आगामी कार्रवाई पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नजर बनी हुई है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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