सोबिता गौतम की अगुवाई में 166 विधेयकों का सुधार अभियान

Hindi News Desk
Hindi News Desk
Read this article also in : English
सोबिता गौतम की अगुवाई में 166 विधेयकों का सुधार अभियान

नेपाल में वर्षों से अटके कानूनों की समीक्षा और जरूरी नए कानून बनाने की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय ने आर्थिक वर्ष 2083/84 को ‘कानून सुधार तथा कानून निर्माण वर्ष’ घोषित किया है।

सरकार ने अगले आर्थिक वर्ष में आगे बढ़ाए जाने वाले 166 विधेयकों की सूची संघीय संसद को सौंप दी है। मंत्रालय का कहना है कि यह सूची केवल घोषणा बनकर नहीं रहेगी। विधेयक का मसौदा तैयार होने से लेकर संसद में पेश किए जाने तक हर चरण की नियमित निगरानी की जाएगी।

कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोबिता गौतम ने वीडियो संदेश जारी कर अभियान की कार्ययोजना सार्वजनिक की है। उनके मुताबिक पुराने और बेअसर हो चुके कानून हटाने, आपस में टकराने वाले प्रावधान सुधारने और बदलती सामाजिक व प्रशासनिक जरूरतों के लिए नए कानून बनाने पर जोर रहेगा।

पुराने कानूनों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति

सरकार एक उच्चस्तरीय कानून सुधार समिति बनाने जा रही है। यह समिति देखेगी कि कौन से कानून अब इस्तेमाल में नहीं हैं, किन प्रावधानों की जरूरत खत्म हो चुकी है और कहां एक ही विषय पर दोहराव या कानूनी टकराव है।

समिति मौजूदा कानूनों के अमल में आ रही दिक्कतों का भी अध्ययन करेगी। इसी आधार पर तय होगा कि किन कानूनों को खत्म करना है, किनमें संशोधन चाहिए और किन प्रावधानों को जोड़कर एक साझा कानून बनाया जा सकता है।

मंत्रालय नए कानून की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान भी करेगा। सरकार की कोशिश है कि कानून सुधार केवल दफ्तरों की राय पर न टिके, बल्कि सामाजिक बदलाव और आम लोगों की जरूरत भी उसमें दिखाई दे।

166 विधेयकों के लिए बनेगा बिल ट्रैकिंग सिस्टम

किस मंत्रालय में कौन सा विधेयक अटका है, मसौदा बना या नहीं और स्वीकृति की प्रक्रिया कहां पहुंची—अब इन सवालों का रिकॉर्ड एक अलग प्रणाली में रखा जाएगा।

मंत्रालय ‘गवर्नमेंट बिल ट्रैकिंग सिस्टम’ शुरू करने की तैयारी में है। इसमें विधेयक की शुरुआती तैयारी से लेकर संसद में पेश होने तक की स्थिति देखी जा सकेगी।

विधायन ऐन, 2081 की धारा 3 के तहत विधेयकों की प्राथमिकता तय की जाएगी। कौन सा विधेयक पहले संसद में जाना चाहिए और उसकी तैयारी कितनी पूरी है, इसे भी ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है क्योंकि कई बार सरकार विधेयक आगे बढ़ाने की घोषणा तो करती है, लेकिन मंत्रालय स्तर पर मसौदा समय पर तैयार नहीं होता। कुछ विधेयक संसद पहुंचने के बाद समितियों में लंबे समय तक रुके रहते हैं।

हर महीने मंत्रालयों से मांगी जाएगी प्रगति

अब हर महीने के पहले सोमवार को विभिन्न मंत्रालयों के कानून महाशाखा और शाखा प्रमुखों की बैठक होगी। इसमें विधेयकों की स्थिति, तैयारी में आ रही समस्या और अगले चरण की समीक्षा की जाएगी।

संबंधित मंत्रियों के साथ भी नियमित चर्चा होगी। मसौदा बनाने, मंजूरी लेने और संसद में विधेयक पेश करने में जहां जरूरत होगी, कानून मंत्रालय तकनीकी और प्रक्रियागत मदद देगा।

विधेयक संसद में दर्ज होने के बाद प्रक्रिया तेज रखने के लिए सभामुख, संसदीय समितियों के सभापति और संसद के महासचिव से समन्वय किया जाएगा।

मंत्रालय ने विधेयक निर्माण और संसदीय प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की तकनीकी तथा प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने की योजना भी बनाई है।

नागरिकों के सुझाव भी बनेंगे कानून का आधार

कानून निर्माण को केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रखने की कोशिश भी की जा रही है। मंत्रालय ने ‘नो योर लॉ, मेक योर ओन लॉ’ अवधारणा के तहत सुझाव पोर्टल शुरू किया है।

मंत्री गौतम के मुताबिक पोर्टल पर अलग-अलग विषयों से जुड़े करीब 100 महत्वपूर्ण सुझाव मिल चुके हैं। इनका अध्ययन किया जा रहा है। उपयोगी सुझावों पर संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद उन्हें कानून संशोधन या नए कानून की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

कानून लागू करने के दौरान सीधे समस्या झेलने वाले सरकारी अधिकारियों की राय भी इसी व्यवस्था से ली जाएगी। व्यवहार में दिखने वाली अस्पष्टता, कमजोरी और प्रशासनिक रुकावटों के आधार पर सुधार प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

अदालत के फैसलों पर भी होगी कार्रवाई

कानून सुधार की सूची केवल सरकार की अपनी जरूरतों से तय नहीं होगी। सर्वोच्च अदालत और अन्य अदालतों के आदेश तथा फैसलों का अध्ययन भी किया जाएगा।

जिन मामलों में अदालत ने कानूनी खालीपन, अस्पष्ट प्रावधान या संविधान से मेल न खाने वाली व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाया है, उन्हें वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर नया विधेयक तैयार होगा या मौजूदा कानून में संशोधन किया जाएगा।

संघ, प्रदेश और स्थानीय स्तर पर बनने वाले कानूनों के लिए एक ‘कानून तर्जुमा निर्देशिका’ भी तैयार की जाएगी। इसमें कानून की भाषा, ढांचा, संवैधानिक सीमा और संघीय व्यवस्था से जुड़े आधार स्पष्ट किए जाएंगे।

मंत्रालय का मानना है कि इससे तीनों स्तर की सरकारों में बनने वाले कानूनों के बीच टकराव और अस्पष्टता कम की जा सकेगी।

कानून सुधार वर्ष की नौ प्रमुख योजनाएं

  • मौजूदा कानूनों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय कानून सुधार समिति बनाना।
  • विधेयक निर्माण, संसदीय चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया को तेज करना।
  • हर महीने के पहले सोमवार को विधेयकों की प्रगति समीक्षा करना।
  • संबंधित मंत्रियों के साथ नियमित परामर्श कर लंबित काम आगे बढ़ाना।
  • नागरिकों से मिले उपयोगी सुझावों को कानून निर्माण में शामिल करना।
  • सरकारी अधिकारियों के व्यावहारिक अनुभव के आधार पर कानूनी सुधार करना।
  • अदालतों के आदेश और फैसलों से सामने आए मुद्दों पर विधेयक तैयार करना।
  • संघ, प्रदेश और स्थानीय स्तर के लिए कानून तर्जुमा निर्देशिका बनाना।
  • 166 विधेयकों की स्थिति देखने के लिए सरकारी बिल ट्रैकिंग सिस्टम चलाना।

योजना बड़ी है और विधेयकों की संख्या भी कम नहीं। लेकिन असली परीक्षा घोषणा की नहीं, अमल की होगी।

मसौदे समय पर तैयार हों, प्रभावित पक्षों से खुली चर्चा हो और संसद में विधेयकों पर गंभीर बहस के बाद फैसला लिया जाए—कानून सुधार वर्ष की सफलता इसी पर निर्भर करेगी।

DISCLAIMER
DISCLAIMER +

यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।