नेपाल में लगातार हो रही बिजली कटौती अब सिर्फ लोगों की परेशानी का मुद्दा नहीं रह गई है। संसद से लेकर सड़क और सोशल मीडिया तक इस पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार जहां तत्काल सुधार की बात कर रही है, वहीं पूर्व अधिकारी इसे सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि संस्थागत नेतृत्व से जुड़ी चुनौती भी मान रहे हैं।
ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री बिराजभक्त श्रेष्ठ ने पश्चिमी नेपाल के दौरे के बाद कहा कि बार-बार बिजली बाधित होने की स्थिति रिकॉर्ड में दिख रही तस्वीर से कहीं ज्यादा गंभीर है। इसी को देखते हुए सरकार ने निगरानी और त्वरित समाधान के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
मंत्री के मुताबिक अभियान के पहले ही दिन हॉटलाइन पर आई सभी शिकायतों पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि लोगों की शिकायतों का तुरंत जवाब देना और बिजली आपूर्ति को भरोसेमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
पूर्व प्रमुख ने उठाया नेतृत्व का सवाल
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी निदेशक कुलमान घिसिङ का कहना है कि मौजूदा स्थिति को केवल तकनीकी खराबी मानकर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार बरसात के मौसम में कुछ समय के लिए बिजली बाधित होना असामान्य नहीं है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों से जल्दी निपटने के लिए अनुभवी और निर्णय लेने में सक्षम नेतृत्व जरूरी होता है।
घिसिङ ने दावा किया कि नेपाल विद्युत प्राधिकरण लंबे समय से पूर्णकालिक नेतृत्व के बिना काम कर रहा है। उनका कहना है कि इसका असर फैसलों की गति और व्यवस्था दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर समस्या के बाद सिर्फ समिति बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
दीर्घकालिक सुधार पर जोर
कुलमान घिसिङ का मानना है कि बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निर्माणाधीन ट्रांसमिशन और वितरण परियोजनाओं को समय पर पूरा करना होगा। साथ ही बिजली प्रणाली के आधुनिकीकरण, नियमित रखरखाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है।
एक तरफ ऊर्जा मंत्री बिराजभक्त श्रेष्ठ तत्काल राहत के लिए चलाए जा रहे अभियान को सरकार की प्राथमिक पहल बता रहे हैं। दूसरी ओर कुलमान घिसिङ का कहना है कि स्थायी समाधान तभी संभव है, जब नेपाल विद्युत प्राधिकरण को पूर्णकालिक, सक्षम और अधिकार संपन्न नेतृत्व मिले।
लगातार हो रही बिजली कटौती के बीच सरकार के तात्कालिक कदम और संस्थागत सुधार की जरूरत को लेकर बहस अब और तेज होती दिख रही है।