काठमांडू से एक अहम खबर सामने आई है। नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव ने अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत स्कॉट अर्बम से मुलाकात की। मंत्रालय में हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर लंबी बातचीत हुई।
असल मुद्दा यह है कि नेपाल को अमेरिकी बाजार में मिलने वाली व्यापार सुविधा खत्म हो चुकी है। 2015 में शुरू हुआ नेपाल ट्रेड प्रिफरेंस प्रोग्राम पिछले दिसंबर में समाप्त हो गया। मंत्री यादव ने राजदूत अर्बम के सामने यह मुद्दा साफ तौर पर उठाया और इसे दोबारा बहाल करने की मांग की।
TIFA समझौते को फिर सक्रिय करने की मांग
दोनों देशों के बीच पहले से व्यापार और निवेश ढांचा समझौता, यानी TIFA, मौजूद है। लेकिन यह लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा है। मंत्री यादव ने इसे दोबारा सक्रिय करने और नियमित संवाद शुरू करने पर जोर दिया।
नेपाल की तरफ से यह भी कहा गया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नीतिगत और कानूनी सुधार किए हैं। जलविद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश की उम्मीद जताई गई।
व्यापार घाटा बड़ी चिंता
आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका इस समय नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऊनी कालीन, तैयार परिधान और पश्मिना जैसे पारंपरिक नेपाली उत्पाद अमेरिका भेजे जाते हैं। लेकिन इस व्यापार में नेपाल को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है।
मंत्री यादव ने कहा कि इस असंतुलन को कम करने के लिए तकनीक हस्तांतरण और दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी मजबूत करनी होगी।
1947 से चला आ रहा है रिश्ता
बैठक की शुरुआत में मंत्री यादव ने नेपाल और अमेरिका के बीच 1947 से चले आ रहे कूटनीतिक रिश्ते का जिक्र किया। स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक विकास में अमेरिका से मिली मदद के लिए उन्होंने आभार जताया। अमेरिका में रह रहे नेपाली समुदाय को भी उन्होंने इस रिश्ते की एक अहम कड़ी बताया।
राजदूत अर्बम ने नेपाल की सभी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमेरिका आगे भी नेपाल के साथ सहयोग जारी रखेगा।
अब देखना यह है कि व्यापार सुविधा की बहाली और TIFA को सक्रिय करने की यह पहल आने वाले महीनों में किस हद तक जमीन पर उतरती है।