सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ा, अब 21% तक ज्यादा भुगतान
नेपाल में नए आर्थिक वर्ष 2083/84 की शुरुआत के साथ सरकारी कर्मचारियों का बढ़ा हुआ वेतन लागू हो गया है। चार साल बाद वेतन में बदलाव हुआ है। महंगाई से जूझ रहे कर्मचारियों को अब मूल वेतन में बढ़ोतरी के साथ प्रोत्साहन भत्ता भी मिलेगा।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने 15 जेठ को पेश बजट में शुरुआती वेतनमान 10 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की थी। उसी फैसले के आधार पर निजामती कर्मचारी, सुरक्षा निकायों में कार्यरत जनशक्ति और सरकारी शिक्षक संशोधित वेतन पाने लगे हैं।
मूल वेतन बढ़ा, महंगाई भत्ता जारी
सरकार ने कर्मचारियों का मूल वेतन 10 प्रतिशत बढ़ाया है। पहले से दिया जा रहा महंगाई भत्ता भी बंद नहीं किया गया है।
इसके साथ मासिक 10 प्रतिशत प्रोत्साहन भत्ते की नई व्यवस्था शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि यह भत्ता कर्मचारियों के काम और जिम्मेदारी से जुड़ा होगा।
नई व्यवस्था के बाद कर्मचारियों की कुल मासिक आमदनी पहले के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
हालांकि प्रोत्साहन भत्ता सभी कर्मचारियों को एक समान मिलेगा या इसके लिए अलग मूल्यांकन प्रणाली बनेगी, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। इसके नियम कार्यान्वयन के दौरान तय होने की उम्मीद है।
न्यूनतम वेतन करीब 40 हजार रुपये
संशोधित वेतनमान में ग्रेड जोड़ने के बाद निजामती सेवा, सुरक्षा निकाय और शिक्षक सेवा के कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन करीब 40 हजार रुपये पहुंच गया है।
ऊंचे पदों पर कार्यरत अधिकारियों का मासिक वेतन एक लाख रुपये से अधिक हो गया है।
सरकारी कर्मचारी संगठन लंबे समय से महंगाई के आधार पर वेतन समायोजन की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि खाने-पीने की चीजों, घर के किराये, शिक्षा और इलाज का खर्च लगातार बढ़ा है, जबकि चार साल से वेतन में कोई बदलाव नहीं हुआ।
काम के आधार पर भुगतान की तैयारी
सरकार ने इस फैसले को केवल वेतन बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रखा है। प्रोत्साहन भत्ते को कार्यसम्पादन से जोड़कर सरकारी सेवा में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश भी की गई है।
सरकार का मानना है कि बेहतर वेतन से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं में सुधार आएगा। लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि काम का मूल्यांकन किस तरह किया जाता है और व्यवस्था कितनी निष्पक्ष रहती है।
बाजार की महंगाई बनी बड़ी चिंता
वेतन बढ़ने से कर्मचारियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन असली फायदा तभी होगा जब बाजार में कीमतें काबू में रहें।
अक्सर वेतन बढ़ने के बाद किराया, स्कूल फीस और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगते हैं। ऐसा हुआ तो अतिरिक्त आमदनी का बड़ा हिस्सा महंगाई में ही निकल सकता है।
इसलिए वेतन बढ़ोतरी के साथ बाजार की प्रभावी निगरानी भी जरूरी मानी जा रही है। सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि कर्मचारियों को मिली राहत बाजार की नई महंगाई में दबकर न रह जाए।
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