नारायणी के डॉक्टरों का सामूहिक इस्तीफा, मंत्रालय की अपील
नारायणी अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए हमले के विरोध ने अब बड़ा रूप ले लिया है। सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया है। अस्पताल के कई डॉक्टर अपने पद से इस्तीफा सौंप चुके हैं, जबकि बाकी भी यही कदम उठाने की तैयारी में हैं।
अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. उदयनारायण सिंह के अनुसार, अस्पताल में कुल 70 डॉक्टर कार्यरत हैं। इनमें से 30 डॉक्टरों ने सोमवार रात ही मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट डॉ. चित्तरञ्जन साह के पास अपना इस्तीफा जमा कर दिया। अन्य डॉक्टर भी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की प्रक्रिया में हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल परिसर के भीतर हुई हिंसा के बाद भी प्रशासन ने अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं निभाई। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों की मांग है कि प्रमुख जिला अधिकारी और जिला पुलिस प्रमुख (एसपी) नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाबदेही तय करें।
देशभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आंदोलनरत डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशभर के चिकित्सक भी सामूहिक इस्तीफे का रास्ता अपना सकते हैं।
उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- हमले में शामिल लोगों को तुरंत कानून के दायरे में लाया जाए।
- अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
- स्वास्थ्यकर्मियों पर होने वाली हिंसा के मामलों में राज्य शून्य सहनशीलता की नीति अपनाए।
नेपाल चिकित्सक संघ ने भी किया विरोध
नेपाल चिकित्सक संघ ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए मंगलवार को देशभर के अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं स्थगित करने की घोषणा की है।
संघ का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर लगातार हो रहे हमले अब गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुके हैं। संगठन ने आंदोलन के अगले चरण की भी तैयारी की बात कही है।
संघ ने नारायणी अस्पताल में तोड़फोड़ और डॉक्टरों की पिटाई में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने पदाधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप भी लगाया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की अपील
स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों से उपचार सेवाएं बाधित नहीं करने की अपील की है। मंत्रालय का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा जीवनरक्षक और अत्यावश्यक सेवा है, इसलिए मरीजों के इलाज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए।
मंत्रालय के अनुसार, घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम करने का अधिकार है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 8 साउन को वीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल में इलाज के दौरान हुए विवाद के बाद अस्पताल में तोड़फोड़ की गई थी। इसी दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटना सामने आई। इस घटना के बाद पूरे नेपाल में स्वास्थ्यकर्मियों के बीच नाराजगी बढ़ गई।
हमले में घायल डॉ. प्रमोद राम को आगे के इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया। स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने ट्रमा सेंटर पहुंचकर उनका हालचाल जाना और सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
नारायणी अस्पताल की यह घटना अब केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रह गई है। इसने स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा, डॉक्टरों के कार्यस्थल की सुरक्षा और मरीजों को बिना रुकावट इलाज उपलब्ध कराने की सरकारी जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और आंदोलन कर रहे डॉक्टरों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है।
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