देवानगंज पर सर्वदलीय बैठक, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अनुपस्थित
सुनसरी के देवानगंज में एक व्यक्ति की मौत के बाद पैदा हुए तनाव और बिगड़ते माहौल को लेकर सिंहदरबार में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। बैठक का उद्देश्य राजनीतिक दलों के बीच साझा समझ बनाना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश देना था। हालांकि इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ और गृहमंत्री सुधन गुरुङ शामिल नहीं हुए।
बैठक का आह्वान राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने ने किया था। सिंहदरबार स्थित सार्वजनिक लेखा समिति के बैठक कक्ष में हुई चर्चा में कई प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
नेपाली कांग्रेस के सभापति गगनकुमार थापा, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’, जनमत पार्टी के अध्यक्ष सीके राउत और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन समेत कई नेता बैठक में पहुंचे।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली बैठक में शामिल नहीं हुए। उनकी ओर से पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल ने प्रतिनिधित्व किया। इसी तरह श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्क साम्पाङ भी बैठक में नहीं आए। उनकी जगह प्रमुख सचेतक आर्यन राई बैठक में मौजूद रहे।
सभी दलों को दिया गया था निमंत्रण
रास्वपा के महामंत्री विपिनकुमार आचार्य ने बताया कि संघीय संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजनीतिक दलों के अलावा जनता समाजवादी पार्टी, लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी और जनमत पार्टी सहित अन्य दलों को भी चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।
उन्होंने कहा कि संबंधित दलों को औपचारिक पत्र भेजने के साथ-साथ रवि लामिछाने ने खुद भी नेताओं से फोन पर संपर्क कर बैठक में शामिल होने का आग्रह किया था।
तनाव कम करने पर रहा जोर
देवानगंज की घटना के बाद तराई-मधेश के कई इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में बैठक बुलाई गई ताकि राजनीतिक दल मिलकर ऐसा संदेश दें जिससे समाज में तनाव और न बढ़े।
रास्वपा का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल प्रशासनिक कदम पर्याप्त नहीं हैं। राजनीतिक दलों की ओर से भी संयम और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील जरूरी है।
बैठक में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और किसी भी तरह की उकसावे वाली गतिविधियों को रोकने पर विशेष चर्चा हुई। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
सरकार की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
देवानगंज की घटना के बाद सरकार की भूमिका को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में शांति और सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण राजनीतिक विमर्श में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की गैरमौजूदगी को कई राजनीतिक हलकों में अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
खासतौर पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे गृहमंत्री के बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर भी राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में मौजूद दलों ने एक स्वर में कहा कि किसी भी हाल में सामाजिक सद्भाव बिगड़ने नहीं दिया जाना चाहिए और राजनीतिक दलों को मिलकर जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।
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