धर्म के नाम पर ‘माता’ बनकर महिला से दुर्व्यवहार करने वाला समीर थापा गिरफ्तार
धर्म और आस्था किसी भी समाज की ताकत हो सकते हैं, लेकिन जब इन्हीं के नाम पर लोगों को डराया जाए, अपमानित किया जाए और अंधविश्वास फैलाया जाए, तो मामला सिर्फ आस्था का नहीं रह जाता। नेपाल के सुर्खेत में सामने आए एक मामले ने फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर खुद को ‘पाथिभरा माता’ बताने वाले समीर थापा को एक महिला के साथ सार्वजनिक दुर्व्यवहार के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
सुर्खेत के वीरेन्द्रनगर नगरपालिका-3 निवासी करीब 24 वर्षीय समीर थापा लंबे समय से सोशल मीडिया पर ‘पाथिभरा माता’ के नाम से सक्रिय थे। पुरुष होने के बावजूद वह खुद को धार्मिक माता के रूप में पेश करते थे। उनके वीडियो, लाइव प्रसारण और कथित धार्मिक गतिविधियां सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहती थीं।
मामला तब गंभीर हो गया जब एक वीडियो सामने आया। वीडियो में समीर थापा एक महिला को ‘डायन’ बताकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करते दिखाई देते हैं। आरोप है कि उन्होंने महिला के साथ मारपीट की और भीड़ के सामने अपने पैर का तलवा चाटने के लिए मजबूर किया।
यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समीर थापा को हिरासत में ले लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
पहले भी विवादों में रहे हैं समीर थापा
खुद को धार्मिक शक्ति से संपन्न बताने वाले समीर थापा पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं।
उनका एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह शराब पीते नजर आए थे। धार्मिक प्रवचन देने वाले व्यक्ति का ऐसा वीडियो वायरल होने के बाद उनके दावों और गतिविधियों पर सवाल उठे थे।
कुछ दिन पहले उन्होंने फेसबुक लाइव के दौरान अपने चरित्र हनन का आरोप लगाया था। उसी दौरान उनके जहर खाने की बात भी सामने आई थी। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया।
हालांकि यह घटना अपनी जगह है, लेकिन इससे उस महिला के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान के आरोप कम गंभीर नहीं हो जाते।
विज्ञान के दौर में भी अंधविश्वास का असर
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह उस सोच की भी याद दिलाता है जिसमें आज भी कई लोग बिना किसी प्रमाण के किसी को चमत्कारी शक्ति वाला मान लेते हैं।
दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और नई वैज्ञानिक खोजों की ओर तेजी से बढ़ रही है, लेकिन समाज के कुछ हिस्सों में आज भी डायन, चमत्कार और कथित धार्मिक शक्तियों के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
सोशल मीडिया ने ऐसे लोगों को और ज्यादा पहुंच दे दी है। कई लोग बिना जांचे-परखे उनके दावों पर भरोसा कर लेते हैं, उनके वीडियो साझा करते हैं और आर्थिक सहयोग भी करते हैं।
धार्मिक वेशभूषा या चमत्कारी दावे किसी व्यक्ति को विश्वसनीय नहीं बना देते। किसी भी दावे को स्वीकार करने से पहले उसके तथ्य, व्यवहार और प्रमाण को परखना समाज की जिम्मेदारी भी है।
सबसे बड़ा सवाल उस महिला की गरिमा का
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू उस महिला की सामाजिक और मानसिक पीड़ा है जिसे सार्वजनिक रूप से ‘डायन’ कहा गया।
ऐसे आरोप किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, परिवार और भविष्य पर गहरा असर छोड़ सकते हैं। भीड़ के सामने किसी महिला को अपमानित करना सिर्फ व्यक्तिगत हिंसा नहीं, बल्कि उसके सम्मान और बुनियादी अधिकारों पर हमला भी है।
अगर लोग यह मान लें कि किसी तथाकथित धार्मिक व्यक्ति ने जो कहा वही सच है, तो झूठा आरोप भी जीवनभर का सामाजिक कलंक बन सकता है। इसका असर पीड़िता के परिवार और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है।
ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि धर्म के नाम पर हिंसा, अपमान और अंधविश्वास फैलाने वालों को स्पष्ट संदेश मिले।
धर्म नहीं, उसका दुरुपयोग है चुनौती
किसी भी धर्म या संस्कृति को मानना हर व्यक्ति का अधिकार है। लेकिन धर्म का इस्तेमाल लोगों को डराने, अपमानित करने या निजी लाभ कमाने के लिए किया जाए, तो यह आस्था नहीं बल्कि उसका दुरुपयोग है।
समाज के लिए भी यह जरूरी है कि वह किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए सच न मान ले क्योंकि वह खुद को माता, बाबा, गुरु या दैवी शक्ति वाला बताता है। विवेक, प्रमाण और कानून—इन्हीं के आधार पर किसी भी दावे का मूल्यांकन होना चाहिए।
समीर थापा उर्फ ‘पाथिभरा माता’ के खिलाफ चल रही जांच निष्पक्ष हो और यदि महिला के साथ सार्वजनिक दुर्व्यवहार, मारपीट और डायन बताने के आरोप साबित होते हैं तो कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाए। यह कार्रवाई सिर्फ एक मामले तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में धर्म के नाम पर लोगों को प्रताड़ित करने वालों के लिए भी चेतावनी बने।
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