बाढ़-पहिरो पर सर्वदलीय बैठक में किसने क्या कहा?

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बाढ़-पहिरो पर सर्वदलीय बैठक में किसने क्या कहा?

भदौ 10 को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। कई लोग अब भी लापता हैं, सड़कें और जरूरी सेवाएं प्रभावित हैं। इस बीच राजनीतिक दलों ने राहत और बचाव से आगे बढ़कर नेपाल की पूरी आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने की पहल पर हुई सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ बैठे। चर्चा का फोकस सिर्फ मौजूदा संकट नहीं था। सवाल यह भी उठा कि हर बड़ी आपदा के बाद दिखने वाली सक्रियता कुछ दिनों में कमजोर क्यों पड़ जाती है और इससे बचने के लिए स्थायी व्यवस्था क्या हो।

बैठक में लापता लोगों की खोज, बंद सड़कों को खोलने, बिजली, पीने के पानी और संचार सेवाओं को बहाल करने तथा विस्थापित परिवारों के अस्थायी पुनर्वास पर तत्काल काम करने की जरूरत बताई गई।

साथ ही कमजोर पूर्वसूचना प्रणाली, हिमालयी इलाकों में बढ़ते खतरे, पड़ोसी देशों के साथ समय पर सूचना साझा करने और जलवायु न्याय के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने पर भी चर्चा हुई।

गगन थापा ने कहा, कुछ दिनों बाद मुद्दा न बन जाए गौण

गगन थापा ने बैठक में एक अहम चिंता सामने रखी। बड़ी आपदा के शुरुआती दिनों में पीड़ितों की स्थिति और नुकसान राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहता है, लेकिन समय बीतने के साथ यह मुद्दा पीछे छूटने लगता है।

उनका जोर था कि इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए। राहत और बचाव का काम जरूरी है, लेकिन बाढ़, भूस्खलन, जलवायु परिवर्तन और हिमनद झील फटने जैसे खतरों को लंबे समय की राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखना होगा।

थापा ने यह भी प्रस्ताव रखा कि आपदा के समय राजनीतिक दल अपने प्रभावी नेटवर्क और संगठन का इस्तेमाल राहत तथा सहायता राशि जुटाने में कर सकें, इसके लिए उचित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

प्रचंड ने जलवायु न्याय और पूर्वसूचना का मुद्दा उठाया

पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने कहा कि संकट के इस समय नागरिकों तक यह संदेश जाना चाहिए कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय आपदा के सामने सभी दल साथ हैं।

उन्होंने सरकार के आपदा प्रतिकार्य में पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही जलवायु न्याय के सवाल को नेपाल के भीतर की बहस तक सीमित न रखकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाने पर जोर दिया।

पूर्वसूचना व्यवस्था भी उनकी चिंता में रही। जोखिम की जानकारी समय रहते, भरोसेमंद तरीके से और प्रभावित हो सकने वाले लोगों तक पहुंचे, इसके लिए मौजूदा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई।

शंकर पोखरेल ने विशेष कार्यदल बनाने का प्रस्ताव रखा

शंकर पोखरेल ने सरकार से खोज और बचाव अभियान को और तेज तथा समन्वित बनाने को कहा। मृतकों और लापता लोगों की पहचान तथा खोज के लिए विशेष कार्यदल बनाने का प्रस्ताव भी उन्होंने बैठक में रखा।

उनका कहना था कि आपदा से प्रभावित बुनियादी ढांचे की मरम्मत में देरी नहीं होनी चाहिए। पीने के पानी और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द सामान्य किया जाए। जरूरत पड़ने पर स्वयंसेवकों को संगठित तरीके से मैदान में उतारने के लिए सरकार औपचारिक आह्वान करे।

पोखरेल ने अपनी ओर से स्वयंसेवक उपलब्ध कराने की तैयारी भी जताई।

उन्होंने पूर्वसूचना प्रणाली की विफलता या कमजोरी की गंभीर समीक्षा और जांच की जरूरत बताई। साथ ही पड़ोसी और दूसरे देशों के साथ आपदा से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए प्रभावी तंत्र बनाने का सुझाव दिया।

राहत वितरण में राजनीतिक प्रभाव न हो: लिङ्देन

राजेंद्र लिङ्देन ने राहत और बचाव के काम को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखने की बात कही। उनका प्रस्ताव था कि सहायता जुटाने से लेकर उसे पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए एकद्वार प्रणाली लागू हो।

विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी पुनर्स्थापना और पुनर्वास का काम भी तुरंत शुरू करने की जरूरत उन्होंने बताई।

लिङ्देन ने आपदा की पूर्वसूचना के अंतरदेशीय पहलू पर सवाल उठाया। उनका सुझाव था कि नेपाल, चीन और भारत के बीच आपदा पूर्वतैयारी और पूर्वसूचना के लिए त्रिपक्षीय सूचना तथा समन्वय तंत्र बनाया जाए।

ध्रुव राई ने प्रभावित इलाकों में टूटे संचार संपर्क को जल्द बहाल करने पर जोर दिया। महन्थ ठाकुर और उपेंद्र यादव ने सरकार को जरूरत के मुताबिक सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।

जनमत पार्टी के चंदन सिंह ने नागढुंगा इलाके में यातायात और आवाजाही में आई समस्या को तत्काल हल करने का मुद्दा उठाया।

सरकार ने माना, नुकसान का पूरा आंकड़ा जुटाना मुश्किल

बैठक में सुदन गुरुङ ने बताया कि सुरंगों और दूसरे संवेदनशील इलाकों में बचाव तथा सुरक्षा के लिए सुरक्षा निकायों को लगाया गया है। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और फिलहाल उसका पूरा विवरण जुटाना भी चुनौती बना हुआ है।

मानवीय क्षति और लापता लोगों की वास्तविक संख्या पता करने के लिए अलग-अलग संयंत्र सक्रिय किए गए हैं। बंद संचार और आवाजाही को फिर शुरू करने के लिए विशेष टीमें भी लगाई गई हैं।

राजनीतिक दलों की ओर से स्वयंसेवक भेजने की तैयारी को सकारात्मक बताते हुए गुरुङ ने भविष्य के खतरे पर भी ध्यान खींचा। हिमनद झीलों और हिमालयी क्षेत्रों से पैदा हो सकने वाले जोखिम के अध्ययन, पूर्वानुमान और शोध के लिए अलग विशेषज्ञ टीम बनाने की जरूरत उन्होंने बताई।

करीब 700 मेगावाट की बिजली परियोजनाएं प्रभावित

स्वर्णिम वाग्ले ने बैठक में रसुवागढ़ी भंसार क्षेत्र में 15 लोगों के लापता होने की जानकारी दी। उनके मुताबिक करीब 700 मेगावाट क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

वाग्ले ने बताया कि आपदा से निपटने में अलग-अलग मंत्रालय अपने कार्यक्षेत्र के मुताबिक काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फिर गति देने के लिए तत्काल आर्थिक पैकेज लागू करने की तैयारी भी है।

चीन के साथ व्यापार और आवाजाही आसान बनाने के लिए वैकल्पिक सीमा नाका चलाने की तैयारी की जानकारी भी बैठक में रखी गई।

विश्व बैंक समेत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता

बैठक में अंतरराष्ट्रीय मदद की स्थिति पर भी जानकारी साझा की गई। स्वर्णिम वाग्ले के मुताबिक विश्व बैंक की ओर से 17 करोड़ अमेरिकी डॉलर के सहयोग या बीमा सहायता की प्रतिबद्धता मिली है।

संयुक्त राज्य अमेरिका और एशियाई विकास बैंक से पांच-पांच लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता मिलने की जानकारी दी गई। चीन ने भी सहयोग का भरोसा दिया है।

भारत की ओर से जरूरी सामग्री और उपकरण के साथ सहायता आने की बात कही गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से नेपाल के प्रति एकजुटता और सहयोग की प्रतिबद्धता का भी बैठक में उल्लेख हुआ।

सबसे बड़ी चुनौती अब जमीन पर नतीजे दिखाने की

सर्वदलीय बैठक में लगभग सभी पक्ष इस बात पर सहमत दिखे कि मौजूदा आपदा को सिर्फ राहत बांटने और सड़कें खोलने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

नेपाल को यह भी पता लगाना होगा कि पूर्वसूचना व्यवस्था कहां कमजोर पड़ी। हिमालयी इलाकों में बदल रहे जोखिमों की निगरानी कैसे होगी। चीन और भारत समेत पड़ोसी देशों से जरूरी सूचना समय पर कैसे मिलेगी। और बड़े नुकसान के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा बुनियादी ढांचा कितनी जल्दी खड़ा किया जा सकेगा।

बैठक बुलाने वाले रवि लामिछाने ने राष्ट्रीय आपदा की गंभीरता को समझते हुए चर्चा में शामिल होने के लिए सभी राजनीतिक दलों का धन्यवाद किया। उन्होंने जानकारी दी कि दलों की साझा सोच और प्रतिबद्धता को औपचारिक रूप देने के लिए संयुक्त वक्तव्य जारी किया जाएगा।

लेकिन फिलहाल सबसे जरूरी काम घटनास्थल पर है। लापता लोगों को खोजना है। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचानी है। विस्थापितों के रहने का इंतजाम करना है। बंद सड़क और संचार संपर्क खोलने हैं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सेवाएं फिर चालू करनी हैं।

सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक एकता दिखी है। अब असली कसौटी यही है कि यह एकता प्रभावित इलाकों में कितनी जल्दी काम और राहत के रूप में दिखाई देती है।

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