सुस्ता में बाढ़ से 170 से ज्यादा घर डूबे
पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के बीच नारायणी नदी का पानी सुस्ता की बस्तियों में घुस गया है। पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता में 170 से ज्यादा घर डूब चुके हैं और 400 से अधिक लोगों को निकालकर होल्डिंग सेंटर में रखा गया है। नदी का बहाव तेज है और बस्ती के पास कटान भी लगातार बढ़ रहा है।
पानी सिर्फ लोगों के घरों तक नहीं पहुंचा। खेत और फसलें डूब गई हैं। नेपाल पुलिस का कार्यालय और सशस्त्र पुलिस बल का बीओपी भी बाढ़ की चपेट में आया है।
पश्चिम नवलपरासी के सीडीओ धर्मेंद्र नेपाल के मुताबिक सुस्ता के थारू टोल, पहाड़िया टोल, सैनिक टोल और बड़का टोल जलमग्न हैं।
बस्ती के पास तेजी से जमीन काट रही नारायणी
सुस्ता में अभी चिंता सिर्फ भरे हुए पानी की नहीं है। नारायणी नदी बस्ती के करीब 50 से 60 मीटर के इलाके में तेजी से कटान कर रही है। इससे पहले से डूबे इलाकों पर नया खतरा खड़ा हो गया है।
सुस्ता लंबे समय से नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद से जुड़ा संवेदनशील इलाका भी रहा है। स्थानीय स्तर पर नारायणी की बाढ़ को गांव में घुसने से रोकने के लिए नेपाली पक्ष की ओर से बांध बनाए जाते रहे हैं। आरोप है कि भारतीय पक्ष सीमा का मुद्दा उठाकर ऐसे बांधों को हटाता या तोड़ता रहा है। कुछ महीने पहले भी नेपाल की तरफ बनाया गया बांध भारतीय पक्ष के लोगों ने तोड़ दिया था।
स्थानीय स्तर पर मौजूदा डुबान को उस घटना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सीमा विवाद के बीच बाढ़ और नदी कटान ने सुस्ता में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
यह मामला अब केवल जमीन के दावे तक सीमित नहीं है। नदी जिस तरह बस्ती के पास कटान कर रही है, उससे सीमा विवाद का समाधान और बाढ़ से स्थायी सुरक्षा दोनों सवाल एक साथ सामने आए हैं।
पश्चिम नेपाल में बारिश का सबसे ज्यादा असर
मौसम विभाग का पिछले दो दिनों के लिए किया गया भारी बारिश का पूर्वानुमान काफी हद तक सही साबित हुआ है। देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटे में कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
पाल्पा के अर्चले इलाके में 24 घंटे के भीतर 245 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। लगातार बारिश से बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ा है। छोटी नदियों और खोलों के आसपास अचानक बाढ़ का खतरा है। तराई में डुबान और पहाड़ी जिलों में भूस्खलन का जोखिम भी बना हुआ है।
भक्तपुर में घरों तक पहुंचा पानी, लोगों को हटाया गया
काठमांडू घाटी के भक्तपुर में हनुमंते, खस्याङखुसुङ और गोदावरी खोला का बहाव काफी बढ़ गया है। डेकोचा और पिखेल होते हुए चांगुनारायण जाने वाली सड़क के कुछ हिस्सों पर पानी बहने से आवाजाही प्रभावित हुई है।
बालकोट, कौशलटार, लोकन्थली और सागबारी में हनुमंते का पानी अस्थायी टहरों तक पहुंच गया। वहां रह रहे लोगों को पुलिस ने सुरक्षित जगह पहुंचाया है।
बोडे और मूलपानी को जोड़ने वाले पुल को भी नुकसान पहुंचा है। इसके बाद इस रास्ते पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।
पाल्पा में भूस्खलन, महिला लापता
पाल्पा में भारी बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। रिब्दीकोट गांवपालिका-6 के धुस्तुङ में पहाड़ से मलबा गिरने के बाद दो कच्चे घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। एक महिला लापता है।
सिद्धार्थ राजमार्ग पर सिद्धबाबा और आसपास के दूसरे हिस्सों में पत्थर और मलबा गिरने से सड़क बंद हुई है।
तिनाउ नदी का जलस्तर भी सतर्कता स्तर से ऊपर पहुंच गया है। बुटवल और नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
गंडकी में सड़कें प्रभावित, मार्दी खोला भी उफान पर
बागलुंग के निसीखोला-4 स्थित ठाडाखोला में मलबे के साथ आई बाढ़ ने मध्यपहाड़ी लोकमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है। कास्की में मार्दी खोला का जलस्तर भी सतर्कता स्तर पार कर चुका है।
लगातार बारिश और भूस्खलन का असर पृथ्वी राजमार्ग के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ा है। काभ्रे की तरफ बीपी राजमार्ग पर बनाए गए कुछ अस्थायी डायवर्जन बाढ़ में बह गए हैं। इससे काठमांडू को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ा है।
सप्तकोशी में बढ़ा बहाव, बैराज के 31 गेट खुले
पूर्वी नेपाल में सप्तकोशी का बहाव भी तेजी से बढ़ा है। शुक्रवार को कोशी बैराज पर करीब 2 लाख 40 हजार क्यूसेक पानी मापा गया। इसके बाद बैराज के 56 में से 31 गेट खोल दिए गए।
झापा में कनकाई, बिरिङ और मेची नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद जोखिम वाले इलाकों में साइरन बजाकर लोगों को सतर्क किया गया।
गौरीगंज और झापा गांवपालिका में एक हजार से ज्यादा परिवार डुबान के जोखिम वाले इलाकों में हैं। प्रशासन नदी किनारे, तटबंधों और संवेदनशील बस्तियों की ड्रोन से भी निगरानी कर रहा है।
बारिश जारी रहने से कई जिलों में खतरा बरकरार
बारिश अभी थमने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में नवलपरासी, रुपन्देही, कपिलवस्तु, पाल्पा, कास्की, बागलुंग, दाङ, बांके, बर्दिया, कैलाली और कंचनपुर समेत पश्चिम नेपाल के कई जिलों में बाढ़ और डुबान का खतरा बना हुआ है।
पहाड़ी इलाकों में लगातार भीग चुकी जमीन के कारण भूस्खलन का जोखिम भी बढ़ा है। नदियों और खोलों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ समय तक सतर्क रहना जरूरी है।
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