सभामुख अर्याल की चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात, सहयोग पर जोर
अन्तरव्यवस्थापिका संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा में हिस्सा ले रहे नेपाल की प्रतिनिधि सभा के सभामुख डोलप्रसाद (डीपी) अर्याल ने चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बातचीत में नेपाल-चीन रिश्तों के साथ संसदीय सहयोग, विकास साझेदारी और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
सभामुख अर्याल ने कहा कि नेपाल और चीन के रिश्ते आपसी सम्मान, अच्छे पड़ोसी संबंध और पंचशील के सिद्धांतों पर टिके हैं। उन्होंने ‘एक चीन नीति’ को लेकर नेपाल की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
अर्याल ने साफ किया कि नेपाल की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
विकास परियोजनाओं और निवेश पर भी बात
मुलाकात के दौरान नेपाल में चीन के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं और निवेश का भी जिक्र हुआ। सभामुख ने इस सहयोग के लिए चीन का आभार जताया और कहा कि आने वाले समय में विकास साझेदारी को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है।
नेपाल लंबे समय से खुद को केवल भू-परिवेष्टित देश के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े देश के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अर्याल ने इस दिशा में चीन से मिले सहयोग को अहम बताया।
उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच सहयोग को सिर्फ विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। व्यापार, निवेश, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक रिश्तों में भी इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
रसुवा की बाढ़ और लापता चीनी नागरिकों का जिक्र
बातचीत में रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का मुद्दा भी उठा। सभामुख अर्याल ने इस आपदा में हुए जान-माल के नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने लापता चीनी नागरिकों के परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
आपदा के बाद चीन की ओर से मिली आपात आर्थिक और मानवीय मदद के लिए उन्होंने धन्यवाद दिया।
खोज और बचाव अभियान में सुरंग बचाव दल, फोरेंसिक और डीएनए विशेषज्ञों के साथ ड्रोन जैसी तकनीकी मदद भी उपलब्ध कराई गई थी। अर्याल ने कहा कि मुश्किल समय में यह सहयोग महत्वपूर्ण रहा।
नेपाल और चीन के संसदों के बीच बढ़ेगा संवाद
दोनों पक्षों की बातचीत का एक अहम हिस्सा संसदीय रिश्तों पर केंद्रित रहा। नेपाल और चीन के बीच संसदीय मैत्री समूह पहले से मौजूद है। प्रतिनिधि सभा और चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के बीच अंतर-संसदीय सहयोग को लेकर समझदारी भी बनी हुई है।
सभामुख अर्याल का मानना है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए दोनों देशों के सांसदों के बीच नियमित बातचीत और अनुभव साझा करने का रास्ता और आसान हो सकता है।
आईपीयू के एशिया-प्रशांत समूह में भी नेपाल और चीन मिलकर काम बढ़ा सकते हैं। खास तौर पर सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, आपदा से निपटने की क्षमता और संसदीय कामकाज में तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर दोनों देश अपने अनुभव साझा कर सकते हैं।
अर्याल ने संसदीय क्षमता बढ़ाने और सतत विकास के क्षेत्र में चीन के साथ सहयोग आगे ले जाने की इच्छा जताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि दोनों देशों की पुरानी दोस्ती का असर संसदीय स्तर पर भी ठोस नतीजों के रूप में दिखना चाहिए।
सभामुख ने कहा कि बदलती जरूरतों और साझा हितों को ध्यान में रखते हुए नेपाल-चीन संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। इसके लिए सरकारी और संसदीय संपर्क के साथ लोगों के बीच रिश्तों को भी आगे बढ़ाना जरूरी है।
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