झापा में जमीन के लिए 60 हजार से ज्यादा परिवारों के आवेदन

Hindi News Desk
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झापा में जमीन के लिए 60 हजार से ज्यादा परिवारों के आवेदन

नेपाल के झापा जिले में 60 हजार से ज्यादा परिवारों ने जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए आवेदन किया है। इनमें भूमिहीन दलित, सुकुमवासी और लंबे समय से बिना जमीन के मालिकाना दस्तावेज के रह रहे परिवार शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद प्रशासन ने जमीन से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने और मालिकाना हक के दस्तावेज बांटने के काम को प्राथमिकता दी है।

जिला भूमि समस्या समाधान समिति के मुताबिक, अब तक 60 हजार 570 परिवारों के आवेदन दर्ज हुए हैं। समिति के अध्यक्ष और झापा के प्रमुख जिला अधिकारी श्रवण कुमार पोखरेल ने बताया कि सबसे ज्यादा आवेदन उन परिवारों के हैं, जो जमीन पर रह रहे हैं लेकिन उनके पास मालिकाना हक के दस्तावेज नहीं हैं।

इनकी संख्या 41 हजार 851 है। इसके अलावा 15 हजार 783 भूमिहीन सुकुमवासी परिवारों और 2 हजार 896 भूमिहीन दलित परिवारों ने आवेदन दिए हैं।

जिले में जमीन से जुड़े कई मामले पहले से भी लंबित हैं। पिछली बार गठित आयोगों के समय जिन परिवारों का काम पूरा नहीं हो पाया था, ऐसे 5 हजार 296 परिवारों का रिकॉर्ड भी समिति के पास है। अब इन पुराने मामलों को भी निपटाना है।

जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए राजस्व की दरों में भी बदलाव किया गया है।

प्रमुख जिला अधिकारी पोखरेल के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत घर बनाने के उद्देश्य से ली जाने वाली जमीन पर न्यूनतम मूल्यांकन का 12 प्रतिशत राजस्व देना होगा। खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन पर यह दर सात प्रतिशत रखी गई है।

समिति का कहना है कि आवेदनों की जांच और जमीन से जुड़े बाकी काम तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए कर्मचारी और संबंधित अधिकारी नियमित रूप से काम कर रहे हैं।

हालांकि, आवेदन करने वाले परिवारों को जमीन के मालिकाना दस्तावेज कब तक मिलेंगे, इसकी कोई तय तारीख अभी सामने नहीं आई है।

इसी बीच नेपाल की भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामले और सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने झापा के अलग-अलग इलाकों का दौरा किया है।

सोमवार और मंगलवार को वह सुकुमवासी परिवारों की बस्तियों में पहुंचीं। वहां उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी उनकी समस्याएं सुनीं।

बातचीत के दौरान मंत्री रावल ने कहा कि सरकार सुकुमवासी समस्या का स्थायी समाधान करने की तैयारी में है। जमीन के मालिकाना दस्तावेज यानी धनीपुर्जा बांटने का काम सरकार की प्राथमिकता में रखा गया है।

दौरे के दौरान उन्होंने भूमि समस्या समाधान समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय निकायों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी की।

रावल ने संबंधित अधिकारियों को धनीपुर्जा वितरण के काम को पहली प्राथमिकता देने और लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

झापा में आए आवेदनों से साफ है कि जमीन के मालिकाना हक का सवाल अभी भी बड़ी संख्या में परिवारों से जुड़ा हुआ है।

कई परिवार पहले गठित आयोगों के समय भी आवेदन कर चुके थे, लेकिन उनकी प्रक्रिया अधूरी रह गई। अब नए आवेदनों के साथ उन पुराने मामलों का भी समाधान करना होगा।

सरकार और जिला प्रशासन ने काम में तेजी लाने की बात कही है। मंत्री के दौरे और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बाद धनीपुर्जा वितरण की प्रक्रिया पर भी ध्यान बढ़ा है।

लेकिन आवेदन दर्ज होना और जमीन का मालिकाना दस्तावेज मिलना दो अलग चरण हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी आवेदनों की जांच कब तक पूरी होगी और पात्र परिवारों को धनीपुर्जा कब मिलेगा।

फिलहाल झापा के हजारों परिवारों को इसी सवाल का जवाब मिलने का इंतजार है।

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