नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा को मनी लॉन्ड्रिंग जांच मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया है। साथ ही अदालत ने आदेश दिया है कि पुराने वारंट के आधार पर दोनों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
इस फैसले को सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले इंटरपोल भी नेपाल सरकार की रेड नोटिस जारी करने की मांग ठुकरा चुका था। इंटरपोल का कहना था कि उपलब्ध सबूत और कानूनी आधार पर्याप्त नहीं हैं।
मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया था जब भाद्र २३ और २४ को हुए जेन्जी आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए थे। इन वीडियो में दावा किया गया था कि बूढ़ानीलकंठ स्थित देउबा निवास से नकदी के बंडल हटाए जा रहे हैं।
इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग की टीम वहां पहुंची थी। अधिकारियों ने घर से जली हुई नेपाली करेंसी के टुकड़े, राख और कुछ अन्य सामग्री जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी थी। बाद में इसी जांच के आधार पर गिरफ्तारी वारंट लिया गया।
विभाग ने चैत्र १४ को काठमांडू जिला अदालत से वारंट हासिल किया था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि राजनीतिक प्रभाव और सत्ता के दुरुपयोग के जरिए अवैध संपत्ति बनाई गई।
लेकिन वारंट जारी होने से पहले ही शेरबहादुर देउबा और आरजू राणा इलाज के लिए सिंगापुर रवाना हो गए थे। इसके बाद सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल से मदद मांगी, लेकिन वहां से भी मंजूरी नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया वारंट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कई कानूनी और प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा किया है।
अदालत ने कहा कि हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को लेकर नया अध्यादेश लागू हुआ है। इसके बाद ऐसे मामलों की सुनवाई जिला अदालत नहीं बल्कि विशेष अदालत में होनी चाहिए।
कोर्ट के मुताबिक अध्यादेश लागू होने के बाद काठमांडू जिला अदालत के पास इस तरह का गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार नहीं बचा था।
सुप्रीम कोर्ट ने वारंट की भाषा पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि दस्तावेज में आरजू राणा की पूरी पहचान साफ तौर पर नहीं लिखी गई थी। उसमें सिर्फ “देउबा और उनकी पत्नी” लिखा गया था।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी गिरफ्तारी वारंट में आरोपी का पूरा नाम, पता, आरोप और पहचान स्पष्ट होना जरूरी है। अदालत के अनुसार यह वारंट उन कानूनी मानकों पर खरा नहीं उतरता था।
जांच अभी खत्म नहीं हुई
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब यह नहीं है कि मामला पूरी तरह खत्म हो गया है।
अदालत ने सिर्फ पुराने वारंट के आधार पर गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। अगर सरकार चाहे तो विशेष अदालत से नया वारंट लेने की कोशिश कर सकती है।
लेकिन देउबा दंपति फिलहाल नेपाल से बाहर हैं और इंटरपोल पहले ही रेड नोटिस जारी करने से इनकार कर चुका है। ऐसे में उन्हें तुरंत हिरासत में लेना सरकार के लिए आसान नहीं दिख रहा।