नेपाल के मेडिकल व्यवसायी दुर्गा प्रसाईं के खिलाफ पर्सा जिला अदालत में औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया गया है। उन पर साइबर अपराध और राज्य विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। पिछले कई हफ्तों से पुलिस उनकी सोशल मीडिया पोस्ट, सार्वजनिक बयान और इंटरव्यू की जांच कर रही थी।
सरकारी वकील कार्यालय ने सोमवार को अदालत में केस दायर किया। इससे पहले 18 मई को पुलिस ने प्रसाईं को वीरगंज के एक होटल से गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने उनके कई सार्वजनिक बयान और ऑनलाइन सामग्री को आधार बनाया है। पुलिस का कहना है कि कुछ टिप्पणियों में महिलाओं, सुरक्षा एजेंसियों और सार्वजनिक व्यक्तियों को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। साथ ही समाज में नफरत और तनाव फैलाने वाले आरोप भी लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कार्रवाई
मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई। अदालत ने पुलिस को जांच पूरी कर कानून के मुताबिक कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा था। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया था कि बिना जरूरत लंबे समय तक हिरासत में न रखा जाए।
जस्टिस विनोद शर्मा और नित्यानंद पांडे की संयुक्त पीठ ने यह आदेश दिया था। इसके बाद पुलिस ने जांच रिपोर्ट जिला सरकारी वकील कार्यालय को सौंपी।
जिला सरकारी वकील मनोज प्रसाद गुप्ता ने बताया कि प्रसाईं पर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन एक्ट 2006 और राज्य विरोधी अपराध से जुड़े प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।
अदालत में बयान पूरा नहीं हो सका
सोमवार को प्रसाईं को अदालत में पेश किया गया, लेकिन उनका बयान उसी दिन पूरा नहीं हो पाया। अदालत ने उन्हें फिर से मंगलवार को पेश करने का आदेश देते हुए फिलहाल हिरासत में रखने को कहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर के आसपास उनके समर्थकों की भीड़ भी देखी गई।
पुलिस का कहना है कि राजनीतिक नेताओं और सरकारी संस्थाओं को लेकर लगाए गए कई सार्वजनिक आरोप भी जांच के दायरे में शामिल किए गए हैं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दुर्गा प्रसाईं की गतिविधियों को लेकर नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज बनी हुई है।