फर्जी भूटानी शरणार्थी कांड में 16 दोषी, किसे कितनी सजा? पूरी सूची

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नकली भूटानी शरणार्थी मामले में काठमांडू जिला अदालत ने 16 लोगों की सजा तय कर दी है। इनमें मुख्य मामले के 15 दोषी हैं, जबकि बेचन झा के खिलाफ अलग से दायर पूरक मामले में फैसला आया है।

मंगलवार को न्यायाधीश तेजबहादुर खड़का की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। सजा पाने वालों में नेपाल के पूर्व गृह मंत्री बालकृष्ण खाण, पूर्व उपप्रधानमंत्री टोपबहादुर रायमाझी, पूर्व गृह सचिव टेकनारायण पांडे और तत्कालीन गृह मंत्री के सुरक्षा सलाहकार डॉ. इंद्रजीत राय जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

मामले में भूमिका के आधार पर धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेज की जालसाजी, संगठित अपराध और राज्य के खिलाफ अपराध में अलग-अलग सजा सुनाई गई है। हालांकि हर अपराध की सजा को सीधे जोड़कर अंतिम जेल अवधि तय नहीं की गई।

नौ लोगों को चार साल की जेल

मुख्य मामले में नौ दोषियों को चार साल कैद और 40 हजार नेपाली रुपये जुर्माने की अंतिम सजा मिली है।

  • केशव प्रसाद दुलाल: सरकारी दस्तावेज की जालसाजी में दो साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, धोखाधड़ी में दो साल और 20 हजार रुपये, संगठित अपराध में तीन साल और 30 हजार रुपये तथा धारा 51(4) के तहत राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल और 15 हजार रुपये जुर्माना। धारा 51(7) में अतिरिक्त सजा नहीं दी गई। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • सानु भंडारी: जालसाजी और धोखाधड़ी में दो-दो साल कैद तथा 20-20 हजार रुपये जुर्माना। संगठित अपराध में तीन साल और 30 हजार रुपये, जबकि राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल और 15 हजार रुपये जुर्माना। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना तय हुई।
  • सागर राय: सरकारी दस्तावेज की जालसाजी के आरोप से बरी किए गए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा मिली। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • संदेश शर्मा: जालसाजी में बरी हुए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा सुनाई गई। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • डॉ. इंद्रजीत राय: जालसाजी के आरोप में बरी हुए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा मिली। धारा 51(7) में छह महीने की अतिरिक्त सजा भी लगाई गई। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • विक्रम के नाम से पहचाने जाने वाले गोविंद कुमार चौधरी: जालसाजी में बरी हुए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा मिली। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • आंगटावा शेरपा: जालसाजी में बरी हुए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा मिली। धारा 51(7) के तहत छह महीने की अतिरिक्त कैद भी सुनाई गई। अंतिम सजा चार साल और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • टेकनारायण पांडे: सरकारी दस्तावेज की जालसाजी में बरी हुए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा मिली। छह महीने की अतिरिक्त कैद भी लगाई गई। अंतिम सजा चार साल कैद और 40 हजार रुपये जुर्माना है।
  • टोपबहादुर रायमाझी: जालसाजी के आरोप से बरी किए गए। धोखाधड़ी में दो साल, संगठित अपराध में तीन साल और राज्य के खिलाफ अपराध में डेढ़ साल की सजा सुनाई गई। धारा 51(7) में छह महीने की अतिरिक्त कैद के बाद अंतिम सजा चार साल और 40 हजार रुपये जुर्माना तय हुई।

खाण और टेकनाथ रिजाल को दो-दो साल

कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री बालकृष्ण खाण को दो साल कैद और 20 हजार नेपाली रुपये जुर्माने की अंतिम सजा मिली है।

उन्हें सरकारी दस्तावेज की जालसाजी में बरी कर दिया गया। धोखाधड़ी में एक साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना, संगठित अपराध में डेढ़ साल और 15 हजार रुपये तथा राज्य के खिलाफ अपराध में छह महीने कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया। धारा 51(7) में तीन महीने की अतिरिक्त कैद भी लगाई गई।

टेकनाथ रिजाल को भी दो साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की अंतिम सजा दी गई है।

रिजाल को सरकारी दस्तावेज की जालसाजी और धोखाधड़ी में एक-एक साल कैद तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माना मिला। संगठित अपराध में डेढ़ साल कैद और 15 हजार रुपये, जबकि राज्य के खिलाफ अपराध में छह महीने कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।

चार दोषियों को एक साल की सजा

नरेंद्र केसी, शमशेर मियां, हरिभक्त महर्जन और निरंजन कुमार खरेल को एक-एक साल कैद और 10-10 हजार नेपाली रुपये जुर्माने की अंतिम सजा मिली है।

चारों को सरकारी दस्तावेज की जालसाजी के आरोप से बरी किया गया है। धोखाधड़ी में छह महीने कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, संगठित अपराध में नौ महीने और साढ़े सात हजार रुपये तथा राज्य के खिलाफ अपराध में छह महीने कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया।

धारा 51(7) के तहत इन चारों पर कोई अतिरिक्त सजा नहीं लगाई गई।

जालसाजी में केवल तीन लोग दोषी

सरकारी दस्तावेज की जालसाजी के मामले में अदालत ने केवल टेकनाथ रिजाल, केशव प्रसाद दुलाल और सानु भंडारी को दोषी माना है।

सागर राय, संदेश शर्मा, डॉ. इंद्रजीत राय, गोविंद कुमार चौधरी, आंगटावा शेरपा, टेकनारायण पांडे, टोपबहादुर रायमाझी, बालकृष्ण खाण, नरेंद्र केसी, शमशेर मियां, हरिभक्त महर्जन और निरंजन कुमार खरेल इस आरोप से बरी हो गए।

दूसरे अपराधों में उनकी सजा बरकरार है।

डॉ. इंद्रजीत राय को उम्र के कारण राहत

डॉ. इंद्रजीत राय की अंतिम सजा चार साल है, लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए जेल अवधि में विशेष छूट दी गई है।

वह 75 साल से अधिक उम्र के हैं। वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी कानूनी व्यवस्था के तहत उन्हें बची हुई जेल अवधि में 75 प्रतिशत छूट मिली है।

मुकदमे के दौरान वह तीन साल, दो महीने और 10 दिन जेल में रह चुके हैं। चार साल की कुल सजा में नौ महीने और 20 दिन बाकी थे। इस अवधि में सात महीने और सात दिन की छूट दी गई।

अब उन्हें दो महीने और 13 दिन जेल में रहना होगा। इसके साथ 40 हजार नेपाली रुपये का जुर्माना भी देना है।

बेचन झा को अलग मामले में एक साल की जेल

बेचन झा का मामला बाकी 15 दोषियों से अलग था। उनके खिलाफ बाद में पूरक आरोपपत्र दायर किया गया था।

झा को धोखाधड़ी की कोशिश के अपराध में एक साल कैद और 10 हजार नेपाली रुपये जुर्माना सुनाया गया है। जालसाजी, संगठित अपराध और राज्य के खिलाफ अपराध सहित दूसरे आरोप अदालत में साबित नहीं हुए।

उन्हें 14 असार 2081 की शुक्रवार रात नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। मुख्य मामले की जांच पूरी होने तक वह फरार थे।

गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ अलग से जांच हुई और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसी वजह से उनका फैसला भी अलग आया।

हर अपराध की सजा सीधे क्यों नहीं जोड़ी गई

इस मामले में एक व्यक्ति को कई अपराधों में अलग-अलग सजा मिली है। इसके बावजूद सभी वर्षों को जोड़कर अंतिम जेल अवधि नहीं बनाई गई।

एक ही घटना से जुड़े कई अपराध होने पर अदालत उन्हें एकीकृत अपराध के रूप में देखती है। सामान्य तौर पर सबसे बड़ी सजा को पूरा रखा जाता है और उसके बाद की दूसरी सबसे बड़ी सजा का आधा हिस्सा उसमें जोड़ा जाता है।

टेकनाथ रिजाल के मामले में सबसे बड़ी सजा डेढ़ साल थी। दूसरी बड़ी सजा एक साल की थी। उसका आधा, यानी छह महीने, डेढ़ साल में जोड़ा गया। इस तरह उनकी अंतिम सजा दो साल बनी।

इसी तरह चार साल की अंतिम सजा पाने वाले कई दोषियों को संगठित अपराध में तीन साल और धोखाधड़ी में दो साल की सजा मिली थी। तीन साल में दो साल का आधा, यानी एक साल जोड़ा गया। अंतिम सजा चार साल हुई।

इसलिए अलग-अलग अपराधों की सजा देखकर यह मानना ठीक नहीं होगा कि किसी को सात या आठ साल जेल में रहना पड़ेगा। अदालत के फैसले में दी गई एकीकृत सजा ही अंतिम कुल सजा है।

अब कितनी जेल बाकी, हर दोषी का हिसाब अलग

सजा सुनाए जाने से पहले न्यायिक हिरासत में बिताया गया समय कुल जेल अवधि में गिना जाएगा।

मसलन, किसी व्यक्ति को चार साल की सजा मिली है और वह पहले ही तीन साल जेल में रह चुका है, तो सामान्य स्थिति में उसे केवल एक साल और जेल में रहना होगा।

लेकिन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और रिहाई की तारीख एक नहीं है। कुछ शुरू से जेल में थे। कुछ जमानत या सामान्य तारीख पर बाहर भी रहे।

इसलिए हर दोषी की बाकी जेल अवधि उसकी गिरफ्तारी, हिरासत, रिहाई और दोबारा जेल भेजे जाने की तारीख के आधार पर अलग से निकाली जाएगी।

जिला अदालत का फैसला अभी अंतिम नहीं

काठमांडू जिला अदालत का यह फैसला कानूनी प्रक्रिया का आखिरी पड़ाव नहीं है।

फैसले से असहमत आरोपी या सरकारी पक्ष तय समय और प्रक्रिया के भीतर उच्च अदालत में अपील कर सकता है। मामला आगे चलकर सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच सकता है।

ऊपरी अदालत जिला अदालत के फैसले को बरकरार रख सकती है। सजा घटाई या बढ़ाई भी जा सकती है। फैसला पलटने का अधिकार भी उच्च अदालत के पास है।

फिलहाल यही सजा लागू है, लेकिन अपील के बाद अंतिम नतीजा बदल सकता है।

DISCLAIMER +

यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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