जनकपुरधाम में बढ़ता कचरा संकट, आस्था स्थल भी प्रभावित

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मधेश प्रदेश की राजधानी और माता सीता की जन्मस्थली के रूप में पहचान रखने वाला जनकपुरधाम इन दिनों कचरा प्रबंधन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर के धार्मिक स्थलों, प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशन और आस्था से जुड़े तालाबों के आसपास बढ़ती गंदगी को लेकर स्थानीय लोग लगातार चिंता जता रहे हैं।

खोज समाचार के ‘जनतासँग मिडिया’ कार्यक्रम के तहत जनकपुरधाम निवासी संजय मंडल ने शहर में फैलते कचरे और सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर शिकायत भेजी। उपलब्ध तस्वीरों और स्थानीय जानकारी से पता चलता है कि शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कचरा प्रबंधन प्रभावी नहीं है।

जानकी मंदिर परिसर में भी दिख रही गंदगी

जनकपुरधाम का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल जानकी मंदिर हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। लेकिन मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में जगह-जगह कचरा जमा होने से स्थानीय लोग नाराज हैं।

मंदिर के आसपास प्लास्टिक, खाने-पीने के पैकेट और अन्य कचरा खुले में फेंके जाने की शिकायतें सामने आई हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बाजार और मुख्य चौक की हालत भी खराब

जनकपुरधाम चौक पर जमा कचरा


जनकपुरधाम चौक पर जमा कचरे का ढेर।

स्थानीय लोगों के अनुसार शहर के मुख्य चौक और बाजार क्षेत्रों में भी नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई स्थानों पर कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही है और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे स्टेशन के आसपास भी फैली गंदगी

भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए जनकपुर रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है। लेकिन स्टेशन के आसपास फैला कचरा शहर की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है।

जनकपुर रेलवे स्टेशन के आसपास बिखरा कचरा


जनकपुर रेलवे स्टेशन के आसपास बिखरा कचरा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि धार्मिक नगरी में आने वाले यात्रियों को साफ-सुथरा वातावरण मिलना चाहिए।

धनुष सागर और गंगा सागर के आसपास बढ़ी गंदगी

जानकी मंदिर के सामने स्थित धनुष सागर और गंगा सागर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जलाशय हैं। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं।

धनुष सागर और गंगा सागर के आसपास फैला कचरा


धनुष सागर (बाएं) और गंगा सागर (दाएं) के आसपास फैला कचरा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाबों के किनारों और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती गंदगी धार्मिक वातावरण और स्वच्छता दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

सुनवाई नहीं हुई तो युवाओं ने किया विरोध

कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर स्थानीय युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने शहर से कचरा एकत्र कर जिला प्रशासन कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर डालकर अपनी नाराजगी जताई।

जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन


कचरा प्रबंधन के विरोध में जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर कचरा डालते स्थानीय युवा।

मुख्यमंत्री निवास के बाहर विरोध


कचरा प्रबंधन के विरोध में मुख्यमंत्री निवास के बाहर कचरा डालते स्थानीय निवासी।

विरोध करने वालों का कहना है कि संबंधित निकायों को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

प्लास्टिक खाकर बीमार पड़ रहे पशु

शहर में खुले में पड़े प्लास्टिक और अन्य कचरे का असर पशुओं पर भी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार आवारा गायें कचरे में फेंका गया प्लास्टिक खा रही हैं, जिससे वे बीमार पड़ रही हैं।

कचरे में प्लास्टिक खाती गाय


जनकपुरधाम में कचरे के ढेर से प्लास्टिक खाती गाय।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में पशुओं की मौत भी हो जाती है। मृत पशुओं का समय पर प्रबंधन नहीं होने से दुर्गंध और पर्यावरणीय समस्या और बढ़ जाती है।

सरकार और स्थानीय निकायों से कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने संघीय सरकार, मधेश प्रदेश सरकार, जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका और संबंधित निकायों से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

उनका कहना है कि जनकपुरधाम की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में है। इसलिए सफाई और कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता देकर शहर की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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