मिराज ढुंगाना के नेतृत्व में पेट्रोलियम टैक्स के खिलाफ रैली

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पेट्रोलियम पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। रसोई गैस से लेकर दैनिक जरूरत की चीज़ों और यातायात खर्च तक महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बढ़ती महंगाई के खिलाफ चितवन में युवाओं ने रविवार को अलग अंदाज़ में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिल चलाकर नहीं, बल्कि हाथ से धकेलते हुए सड़कों पर उतरे।

जेनजी अभियंता मिराज ढुंगाना के नेतृत्व में चल रहे “गरी खाने देऊ” अभियान के तहत आयोजित यह विरोध रैली चौबीसकोठी से शुरू होकर लायन्सचोक तक पहुँची। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए विभिन्न करों को हटाने की मांग करते हुए नारेबाज़ी और प्लेकार्ड प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महंगाई अब केवल ईंधन तक सीमित नहीं रही। खाद्यान्न, दैनिक उपभोग की वस्तुएँ और यातायात सभी महंगे हो चुके हैं। उनका आरोप है कि आर्थिक संकट के बीच सरकार लगातार कर बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

ईंधन पर लगाए गए करों के खिलाफ प्रदर्शन

अभियान के संयोजक मिराज ढुंगाना ने कहा कि सरकार पेट्रोलियम पदार्थों पर कई अलग-अलग शीर्षकों के तहत कर वसूल रही है।

  • सीमा शुल्क
  • प्रदूषण शुल्क
  • सड़क मर्मत शुल्क
  • पूर्वाधार विकास कर
  • मूल्य अभिवृद्धि कर (VAT)
  • हरित कर

ढुंगाना के अनुसार वर्तमान में पेट्रोल की कीमत 217 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच चुकी है, जिसमें बड़ा हिस्सा करों का है।

रैली का नेतृत्व कर रहे युवा बिशु लामा गुरुङ ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार से घाटे में पेट्रोल बेचने की मांग करना नहीं है। उनका कहना था कि आर्थिक संकट के समय लगाए गए अनावश्यक करों को हटाने के लिए दबाव बनाना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने युवाओं और आम परिवारों के दैनिक जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

आगे और कड़े आंदोलन की चेतावनी

आयोजकों के अनुसार “पेट्रोलियम पदार्थ पर 6 कर माफ अभियान” नाम से आयोजित इस प्रदर्शन में 100 से अधिक युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने “गरी खाने देऊ” और “महंगाई के बीच सुशासन गायब” जैसे नारे लिखे बैनर भी उठाए।

आंदोलनकारियों ने सरकार से पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए करों को तुरंत कम करने या पूरी तरह हटाने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर और कड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।

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