शेयर बाजार में गिरावट, वाग्ले सचिवालय की अपील

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शेयर बाजार में गिरावट, वाग्ले सचिवालय की अपील

नई सरकार बनने के बाद भी शेयर बाजार में लगातार गिरावट से निवेशकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। छोटे और बड़े, दोनों तरह के निवेशक दबाव में हैं। इसी बीच वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले के सचिवालय ने लोगों से अफवाहों के आधार पर फैसला न लेने और संयम बनाए रखने की अपील की है।

सचिवालय ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा है कि बाजार गिरने पर निवेशकों की संपत्ति का मूल्य कागज पर कम दिखाई देता है। आगे और नुकसान होने की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में गुस्सा और निराशा स्वाभाविक है।

सरकार ने यह भी माना है कि बाजार की मौजूदा हालत को लेकर निवेशकों की नाराजगी और आलोचना से वह अनजान नहीं है।

आर्थिक माहौल पूरी तरह निराशाजनक नहीं

वित्त मंत्री के सचिवालय के मुताबिक शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, लेकिन देश की पूरी आर्थिक स्थिति को केवल बाजार की गिरावट से नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार का दावा है कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी है, ब्याज दरें नीचे आई हैं और कुछ आर्थिक संकेतकों में सुधार दिख रहा है। इससे निवेश और कारोबारी गतिविधियों के लिए माहौल धीरे-धीरे आसान बन रहा है।

नियमित रूप से कर चुकाने वालों को राहत देने और खर्च बढ़ाने वाली नीतियों पर भी काम होने की बात कही गई है। राजस्व विवाद में फंसे हजारों लोगों और व्यवसायों को छूट देकर फिर से आर्थिक गतिविधि में लौटने का मौका दिया गया है।

नियामक संस्थाओं में नियुक्ति की प्रक्रिया जारी

सचिवालय ने कहा है कि स्थिर सरकार और नियामक संस्थाओं में पारदर्शी तथा ईमानदार नेतृत्व लाने की प्रक्रिया से पूंजी बाजार सुधार का आधार तैयार हो रहा है।

कुछ संस्थाओं में प्रमुखों की नियुक्ति हो चुकी है। बाकी जगहों पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

धितोपत्र बाजार में सुधार के लिए संबंधित नियामक निकायों के जरिए योजनाबद्ध काम शुरू किए जाने का दावा भी किया गया है। साथ ही बाजार को जानबूझकर प्रभावित करने, नियामक संस्थाओं पर दबाव बनाने या कृत्रिम उतार-चढ़ाव पैदा करने वाली गतिविधियों की जांच के संकेत दिए गए हैं।

इसी संदर्भ में भारत के 1991 के हर्षद मेहता प्रकरण का उदाहरण भी दिया गया। संदेश साफ है कि सरकार बड़े स्तर की बाजार हेराफेरी को हल्के में नहीं ले रही।

गिरफ्तारी और जांच की अफवाहों पर सफाई

वित्त मंत्री के सचिवालय ने आरोप लगाया है कि बाजार सुधार की कोशिशों के बीच योजनाबद्ध तरीके से नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि उसने कम प्रचार और ज्यादा काम की नीति अपनाई है। इसी का फायदा उठाकर कुछ समूह अपने हित में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

खास तौर पर किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी होने, किसी कारोबारी के खिलाफ जांच शुरू होने या बड़ी कार्रवाई की तैयारी जैसी अपुष्ट सूचनाएं फैलाए जाने का जिक्र किया गया है। सचिवालय के मुताबिक इन दावों ने निवेशकों में बेवजह डर पैदा किया है।

सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर जिस तरह की कार्रवाई की बातें चल रही हैं, वैसा कोई कदम अफवाहों के आधार पर नहीं उठाया जा रहा।

क्लब हाउस और मैसेजिंग समूह आधिकारिक स्रोत नहीं

निवेशकों से कहा गया है कि क्लब हाउस, व्हाट्सऐप और मैसेंजर समूहों में चलने वाली बातों को सरकारी सूचना न मानें।

स्वघोषित बाजार विश्लेषकों, कुछ संघ-संस्थाओं के पदाधिकारियों और बिना पुष्टि खबर प्रकाशित करने वाले माध्यमों से भी सावधान रहने को कहा गया है। सचिवालय का कहना है कि ऐसी सूचनाओं के पीछे किसी व्यक्ति या समूह का अपना आर्थिक हित हो सकता है।

निवेशकों को दूसरे बाजार में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय हालत, जोखिम, बाजार का रुझान और नियामक सूचनाओं का अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

किसी अफवाह के आधार पर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचने को कहा गया है। संदेह होने पर संबंधित सरकारी संस्था या नियामक निकाय की आधिकारिक सूचना देखने की अपील की गई है।

वित्त मंत्री के सचिवालय का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब लगातार गिरते बाजार ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। सरकार भरोसा लौटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बाजार की धारणा केवल बयान से नहीं बदलेगी। निवेशक अब नीतिगत भरोसे के साथ जमीन पर दिखने वाले नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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