नेपाल की प्रतिनिधिसभा ने चुनाव व्यवस्था से जुड़े दो अहम विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। मंगलवार को हुई सदन की बैठक में ‘प्रतिनिधिसभा सदस्य निर्वाचन (पहला संशोधन) विधेयक, २०८३’ और ‘मतदाता नामावली (पहला संशोधन) विधेयक, २०८३’ को मंजूरी दी गई।
दोनों विधेयक प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार ने वैशाख २५ को संसद में पेश किए थे। अब ये विधेयक राष्ट्रीय सभा भेजे जाएंगे। वहां से पारित होने के बाद दोबारा प्रतिनिधिसभा में आएंगे और फिर सभामुख की प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजे जाएंगे। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही ये कानून लागू हो जाएंगे।
सरकार की ओर से कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोबिता गौतम ने प्रस्ताव पेश किया।
सरकार का कहना है कि चुनाव कानून से जुड़े जिन प्रावधानों को पहले अध्यादेश के जरिए लागू किया गया था, उन्हें अब स्थायी कानूनी आधार देने के लिए ये संशोधन लाए गए हैं।
समावेशिता को लेकर उठे सवाल
विधेयकों पर चर्चा के दौरान सांसद प्रेम बहादुर बायक ने समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली में दिव्यांग समुदाय की भागीदारी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कानून में और स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए ताकि प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
इस पर मंत्री सोबिता गौतम ने जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था जनसंख्या आधारित समावेशी सिद्धांत को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले चुनावों से पहले इस विषय पर आगे अध्ययन और सुधार पर विचार किया जा सकता है।
मतदाता नामावली संशोधन विधेयक पर धारा-दर-धारा चर्चा के दौरान किसी सांसद ने संशोधन प्रस्ताव दर्ज नहीं कराया।
दोनों विधेयक बिना किसी विवाद के आसानी से सदन से पारित हो गए। प्रतिनिधिसभा की अगली बैठक बुधवार सुबह ११ बजे बुलाई गई है।