जलन के इलाज में सुधार के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की तैयारी

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जलन के इलाज में सुधार के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की तैयारी

जलने के बाद शुरुआती घंटों में सही इलाज न मिले तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग से लेकर देशभर में एक जैसी उपचार व्यवस्था लागू करने तक की तैयारी शुरू की है।

स्वास्थ्य एवं खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता ने गुरुवार को जलन उपचार से जुड़े डॉक्टरों और अभियानकर्ताओं के साथ इस विषय पर चर्चा की। बैठक में स्थानीय स्वास्थ्य चौकी से लेकर संघीय अस्पताल तक मरीज को समय पर और सही सेवा देने की व्यवस्था पर बात हुई।

नेपाल क्लेफ्ट एंड बर्न सेंटर, कीर्तिपुर के डॉ. किरण नकर्मी, डॉ. शंकरमान राई और जलन अभियानकर्ता उज्जल थापा बैठक में शामिल हुए। मंत्रालय के मुताबिक, चर्चा का मुख्य केंद्र मौजूदा इलाज व्यवस्था, मरीजों की परेशानी और तुरंत सुधार की जरूरत वाले क्षेत्र रहे।

शुरुआती इलाज में गलती रोकने पर जोर

विशेषज्ञों ने कहा कि जलने के तुरंत बाद किया गया प्राथमिक उपचार आगे के इलाज और मरीज की रिकवरी पर सीधा असर डालता है। गलत तरीके से ठंडा करना, घाव पर घरेलू चीजें लगाना या अस्पताल पहुंचाने में देरी कई बार संक्रमण और दूसरी जटिलताएं बढ़ा देती है।

इसी वजह से स्वास्थ्य चौकियों, एम्बुलेंस सेवाओं, जिला अस्पतालों, प्रांतीय अस्पतालों और संघीय स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में काम कर रहे कर्मचारियों को अलग से जलन प्रबंधन की ट्रेनिंग देने की जरूरत बताई गई।

बात केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रही। मरीज को सबसे पहले संभालने वाले स्वास्थ्यकर्मी, एम्बुलेंस कर्मचारी और रेफरल से जुड़े लोगों को भी एक ही प्रक्रिया के तहत काम कराने पर जोर दिया गया।

देशभर में एक जैसा उपचार प्रोटोकॉल बनाने की तैयारी

अभी अलग-अलग अस्पतालों में जलन के मरीजों का इलाज अलग तरीके से होता है। सरकार और विशेषज्ञों के बीच इस अंतर को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय ‘स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार करने पर चर्चा हुई।

इस प्रोटोकॉल में मरीज की शुरुआती जांच, घाव की गंभीरता तय करने, संक्रमण रोकने, दवा और ड्रेसिंग, रेफरल तथा विशेषज्ञ अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया शामिल की जा सकती है।

मंत्रालय का मानना है कि एक तय मापदंड होने से इलाज में भ्रम कम होगा। छोटे स्वास्थ्य संस्थानों को भी यह साफ रहेगा कि कौन-सा मरीज स्थानीय स्तर पर संभाला जा सकता है और किसे तुरंत बड़े अस्पताल भेजना है।

स्थानीय, प्रांतीय और संघीय अस्पतालों की भूमिका तय होगी

चर्चा में सामान्य जलन का इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की बात उठी। जिन मरीजों को ज्यादा निगरानी या सर्जरी की जरूरत हो, उन्हें प्रांतीय अस्पताल भेजने और गंभीर मरीजों को बिना देरी विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाने पर सहमति दिखी।

अभी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय कमजोर होने से कई मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते हैं। इससे इलाज शुरू होने में समय लगता है और खर्च भी बढ़ता है।

विशेषज्ञों ने तीनों स्तर की सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी साफ करने का सुझाव दिया। रेफरल व्यवस्था मजबूत करने और अस्पतालों के बीच नियमित संपर्क रखने को भी जरूरी बताया गया।

कीर्तिपुर बर्न सेंटर के अनुभव का होगा उपयोग

मंत्री मेहता ने जलन उपचार को स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही। उनके अनुसार, सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है जिसमें मरीज को प्राथमिक उपचार से लेकर विशेषज्ञ सेवा तक पहुंचने में अनावश्यक रुकावट न आए।

नेपाल क्लेफ्ट एंड बर्न सेंटर, कीर्तिपुर ने जलन उपचार में लंबे समय से काम किया है। बैठक में सेंटर के तकनीकी अनुभव, उपचार पद्धति और विशेषज्ञता को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में इस्तेमाल करने की संभावना पर भी चर्चा हुई।

सरकार ने इस क्षेत्र में काम कर रहे डॉक्टरों, संस्थाओं और अभियानकर्ताओं के साथ सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया है।

जलन की घटनाएं कम करने के लिए जनचेतना अभियान, स्वास्थ्यकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, इलाज की गुणवत्ता में सुधार और तय प्रोटोकॉल के प्रभावी पालन पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी।

मंत्रालय के मुताबिक, नीतिगत सुधार, अस्पतालों के बीच समन्वय और आने वाले समय में संयुक्त काम के क्षेत्रों की पहचान के लिए विशेषज्ञों के साथ परामर्श जारी रखा जाएगा।

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