ऑनलाइन व्यापार पर सख्ती, सूचीकरण नहीं तो कार्रवाई
वेबसाइट, मोबाइल एप या फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सामान और सेवाएं बेच रहे कारोबारियों के लिए अब सरकारी सूचीकरण जरूरी होगा। नेपाल सरकार ने डिजिटल माध्यम से चल रहे कारोबार को कानूनी दायरे में लाने के लिए निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है।
वाणिज्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने ऑनलाइन कारोबार करने वाले सभी व्यवसायियों को विभाग के पोर्टल पर सूचीबद्ध होने का निर्देश दिया है। जरूरी प्रक्रिया पूरी किए बिना कारोबार जारी रखने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।
यह व्यवस्था केवल अपनी वेबसाइट या मोबाइल एप से बिक्री करने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों से नियमित रूप से सामान या सेवाएं बेचने वाले कारोबारी भी इसके दायरे में आएंगे।
उद्योग मंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी सक्रियता
सरकार की यह सख्ती उद्योग मंत्री गौरी यादव के निर्देश के बाद सामने आई है। उन्होंने ऑनलाइन व्यापार को कानूनी दायरे में लाने वाली व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद विभाग ने सूचीकरण के नियम का पालन कराने के लिए सक्रियता बढ़ाई है। कारोबारियों से कहा गया है कि वे समय रहते जरूरी प्रक्रिया पूरी करें।
इसका कानूनी आधार विद्युतीय व्यापार ऐन, २०८१ और उसके तहत बनी निर्देशिका, २०८२ है। इन व्यवस्थाओं के मुताबिक डिजिटल माध्यम से वस्तु या सेवा बेचने वाले व्यवसाय को तय प्रक्रिया पूरी कर सरकारी रिकॉर्ड में आना होगा।
फेसबुक से बिक्री करने वाले भी दायरे में
नेपाल में पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के जरिए कारोबार तेजी से बढ़ा है। छोटे व्यवसाय से लेकर व्यक्तिगत स्तर पर सामान बेचने वाले लोग भी फेसबुक और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब केवल यह कहकर नियमों से बाहर नहीं रहा जा सकेगा कि कारोबार किसी वेबसाइट या औपचारिक ई-कॉमर्स एप से नहीं चल रहा है। सोशल मीडिया या दूसरे डिजिटल माध्यम से नियमित बिक्री करने वाले व्यवसायियों को भी विद्युतीय व्यापार से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।
सरकार के लिए यहां एक अहम सवाल कारोबारी की पहचान और जवाबदेही का भी है। डिजिटल माध्यम में ग्राहक और विक्रेता आमने-सामने नहीं होते। ऐसे में विवाद होने पर विक्रेता की स्पष्ट पहचान होना जरूरी हो जाता है।
ऑनलाइन खरीदारी की शिकायतें भी बनी वजह
डिजिटल खरीदारी बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं की शिकायतें भी बढ़ी हैं। ऑनलाइन ठगी, दिखाए गए सामान और मिले सामान की गुणवत्ता में फर्क, भुगतान के बाद सामान न मिलना जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं।
सरकार का मानना है कि कारोबारियों को औपचारिक रिकॉर्ड में लाने से उनकी पहचान तय करने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे उपभोक्ता शिकायतों पर कार्रवाई करना भी आसान हो सकता है।
हालांकि इस व्यवस्था का असली असर उसके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा। केवल सूचीकरण पर्याप्त नहीं होगा। कारोबार की पारदर्शिता, व्यवसायियों की स्पष्ट पहचान और नियमित निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी।
अगर ये व्यवस्थाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन बाजार में ग्राहकों के लिए जोखिम कम करने और भरोसा बढ़ाने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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