कैलाली-कंचनपुर में लालपुर्जा वितरण की स्थिति जानने पहुंचीं मंत्री रावल

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कैलाली-कंचनपुर में लालपुर्जा वितरण की स्थिति जानने पहुंचीं मंत्री रावल

भूमिहीन परिवारों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया कहां अटक रही है, इसे समझने के लिए भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल इन दिनों सुदूरपश्चिम के स्थानीय तहों का दौरा कर रही हैं। कैलाली और कंचनपुर में उन्होंने जनप्रतिनिधियों, संबंधित कार्यालयों और वर्षों से लालपुर्जा का इंतजार कर रहे परिवारों से अलग-अलग बातचीत की है।

मंत्री रावल का जोर इस बात पर है कि स्थानीय और जिला स्तर पर जो काम बाकी हैं, उन्हें जल्दी पूरा किया जाए। उनका कहना है कि जमीन की पहचान, नाप-जांच और जरूरी कागजी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होगी तो लालपुर्जा वितरण भी आगे नहीं बढ़ पाएगा।

भूमिहीन परिवारों से सीधे सुनी परेशानी

यह दौरा सिर्फ सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रखा गया है। रावल ने भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बसोबास वाले परिवारों से सीधे मुलाकात कर उनकी दिक्कतें सुनीं।

कई परिवार लंबे समय से जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास स्वामित्व का प्रमाण नहीं है। लालपुर्जा पाने की प्रक्रिया में कहां परेशानी आ रही है, किन कागजों या प्रक्रियाओं में मामला अटक रहा है और स्थानीय स्तर पर क्या किया जाना बाकी है, इन सवालों पर मंत्री ने लोगों से जानकारी ली।

रावल का कहना है कि मंत्रालय से सीधे जुड़े ऐसे मामलों की वास्तविक स्थिति केवल काठमांडू में बैठकर नहीं समझी जा सकती। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर जाकर नागरिकों और जिम्मेदार निकायों से बात की जा रही है।

कैलाली के कई पालिकाओं में काम की समीक्षा

कैलाली में मंत्री रावल धनगढी उपमहानगरपालिका के साथ कैलारी गांवपालिका, भजनी, टीकापुर, लम्कीचुहा, बर्दगोरिया, घोडाघोडी और गौरीगंगा समेत विभिन्न स्थानीय तहों में पहुंची हैं।

यहां जमीन की नाप-जांच से लेकर लालपुर्जा वितरण तक की प्रगति पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से चर्चा हुई। जिन चरणों का काम अभी बाकी है, उन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा करने को कहा गया है।

मंत्री ने साफ किया कि स्थानीय तह की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में बेहद अहम है। आंकड़े जुटाने, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान और जमीन की नाप-जांच जैसे काम में देरी का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो लालपुर्जा का इंतजार कर रहे हैं।

कंचनपुर में भी जमीन के मामलों पर चर्चा

कंचनपुर में रावल ने दोधारा-चांदनी, भीमदत्त, बेदकोट, शुक्लाफांटा और कृष्णपुर समेत कई पालिकाओं में जमीन से जुड़े काम की स्थिति समझी।

यहां भी चर्चा का बड़ा हिस्सा भूमिहीन नागरिकों के सामने आ रही कानूनी और प्रक्रियागत मुश्किलों पर रहा। स्थानीय तह और दूसरे सरोकार वाले निकायों से पूछा गया कि लालपुर्जा वितरण की प्रक्रिया किस चरण में है और उसे आगे बढ़ाने के लिए अभी क्या काम बाकी है।

भूमिहीन परिवारों से बातचीत में रावल ने कहा कि सरकार ने लालपुर्जा उपलब्ध कराने का रास्ता खोल दिया है और जरूरी कानूनी सुधार भी आगे बढ़ाए गए हैं।

उन्होंने लोगों से प्रक्रिया को लेकर फैलने वाली अफवाहों से सावधान रहने को कहा। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बसोबासी सरकारी प्रक्रिया से बाहर नहीं रहने चाहिए।

तीनों सरकारों के बीच तालमेल पर जोर

भूमि से जुड़े सवाल केवल किसी एक सरकार या कार्यालय के भरोसे हल नहीं होंगे। मंत्री रावल ने संघ, प्रदेश और स्थानीय तह के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई है।

उनके मुताबिक किसी एक स्तर पर जरूरी काम या सहयोग रुकने से पूरे पालिका क्षेत्र की लालपुर्जा वितरण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका नुकसान आखिर में उन नागरिकों को उठाना पड़ता है जो वर्षों से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इसी वजह से उन्होंने जिम्मेदार निकायों को अपने हिस्से की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और लंबित काम की रफ्तार बढ़ाने को कहा है।

सहकारी पीड़ितों और आरक्ष प्रभावितों की बात भी सुनी

सुदूरपश्चिम दौरे में जमीन के अलावा सहकारी संस्थाओं में फंसी बचत का मुद्दा भी सामने आया। अपनी रकम वापस नहीं पा सके सहकारी पीड़ितों ने मंत्री के सामने अपनी परेशानी रखी।

रावल ने कहा कि पीड़ित बचतकर्ताओं की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया सरकार की प्राथमिकता में है। उनके मुताबिक कैलाली में रकम लौटाने का काम शुरू हो चुका है।

कंचनपुर में उन्होंने लंबे समय से समाधान का इंतजार कर रहे आरक्ष प्रभावित नागरिकों से भी मुलाकात की। रावल ने कहा कि उनकी समस्याएं भी सरकार की प्राथमिकता में हैं और समाधान के लिए जरूरी पहल की जाएगी।

फिलहाल कैलाली और कंचनपुर में मंत्री का दौरा जारी है। सबसे ज्यादा ध्यान उन परिवारों पर है जो जमीन पर वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन अब भी लालपुर्जा का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय और जिला स्तर पर बची प्रक्रिया जितनी जल्दी पूरी होगी, उनके हाथ में जमीन के स्वामित्व का प्रमाण पहुंचने का रास्ता उतना ही आगे बढ़ेगा।

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