तमिल फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता जोसेफ विजय अब केवल पर्दे के नायक नहीं रहे। तमिलनाडु की सत्ता संभालने के बाद उनके शुरुआती फैसलों ने उन्हें देश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उनकी सरकार के कुछ कदमों को समर्थक एक अलग राजनीतिक मॉडल के रूप में पेश कर रहे हैं।
राजनीति में अक्सर नेताओं को दो सोच के आधार पर देखा जाता है। एक वर्ग ऐसा होता है जो आर्थिक विकास के नाम पर उद्योग, निवेश और बड़े कारोबारी ढांचे को प्राथमिकता देता है। दूसरा वर्ग उन लोगों का माना जाता है जो सरकारी संसाधनों को सीधे गरीब और मध्यम वर्ग तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। विजय के शुरुआती फैसलों को देखने वाले कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनकी सरकार फिलहाल दूसरे रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है।
सिनेमा से सत्ता तक का सफर
जोसेफ विजय दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। भारत के साथ-साथ नेपाल समेत कई देशों में उनके प्रशंसक मौजूद हैं। वर्षों तक फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
2 फरवरी 2024 को उन्होंने तमिळगा वेट्री कझगम (TVK) नामक राजनीतिक दल की स्थापना की। पार्टी ने शुरुआत से ही खुद को भ्रष्टाचार विरोधी और जनकल्याणकारी राजनीति का समर्थक बताया। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने कई ऐसे वादे किए जिनकी वजह से आम लोगों के बीच उसकी पहचान तेजी से बनी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 108 सीटें जीत लीं। हालांकि सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से वह कुछ सीटें पीछे रह गई थी। बाद में कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के समर्थन से सरकार का गठन हुआ और 10 मई को विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
तमिलनाडु भले ही क्षेत्रफल के लिहाज से नेपाल से छोटा माना जाता हो, लेकिन आबादी और आर्थिक गतिविधियों के मामले में यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। राज्य की आबादी लगभग साढ़े सात करोड़ बताई जाती है और इसकी अर्थव्यवस्था कई देशों से बड़ी मानी जाती है।
200 यूनिट मुफ्त बिजली का फैसला क्यों चर्चा में है?
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय सरकार का सबसे चर्चित फैसला 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की घोषणा रही।
सरकार का तर्क है कि बिजली अब केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत बन चुकी है। ऐसे में कम आय वाले परिवारों को राहत देना जरूरी है। एक सामान्य परिवार में पंखा, टीवी, फ्रिज और कुछ लाइटों का उपयोग होता है। ऐसे घरों के लिए 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली का मतलब मासिक खर्च में उल्लेखनीय कमी माना जा रहा है।
हालांकि सरकार ने इस योजना को पूरी तरह सार्वभौमिक नहीं बनाया है। इसके लिए एक सीमा तय की गई है ताकि अधिक खपत करने वाले परिवार अतिरिक्त लाभ न ले सकें।
तमिलनाडु में बिजली का बिल दो महीने में एक बार जारी होता है। यदि किसी परिवार की दो महीने की कुल खपत 500 यूनिट से कम रहती है तो उसे 200 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा। लेकिन यदि खपत 500 यूनिट से अधिक हो जाती है तो यह अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि राज्य में पहले से लागू 100 यूनिट मुफ्त बिजली योजना जारी रखी गई है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल करीब 17 अरब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है। नेपाली मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 28 अरब रुपये के बराबर बैठती है।
इतना पैसा आएगा कहां से?
मुफ्त बिजली योजना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि सरकार इसके लिए धन की व्यवस्था कैसे करेगी।
विजय सरकार का दावा है कि इस खर्च का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार और वित्तीय रिसाव को रोककर निकाला जा सकता है। विशेष रूप से शराब बिक्री व्यवस्था को सरकार ने अपने शुरुआती सुधारों का केंद्र बनाया है।
भारत के कई राज्यों में शराब कारोबार सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत माना जाता है। तमिलनाडु भी इससे अलग नहीं है। वर्षों से यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि शराब बिक्री से होने वाली कमाई का पूरा लाभ सरकारी खजाने तक नहीं पहुंच पाता।
सरकारी व्यवस्था के भीतर धन के दुरुपयोग, राजनीतिक फंडिंग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विजय सरकार का कहना है कि इसी क्षेत्र में सुधार करके बड़ी रकम बचाई जा सकती है।
मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद हुई कैबिनेट बैठकों में शराब बिक्री प्रणाली की समीक्षा की गई। सरकार ने उन व्यवस्थाओं को बंद करने के निर्देश दिए जिन पर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे थे।
इसके साथ ही स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास संचालित 717 शराब दुकानों को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया गया।
सरकारी अनुमान है कि शराब कारोबार में कथित तौर पर होने वाले वित्तीय नुकसान को रोककर राज्य को हर साल लगभग 36 अरब रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो मुफ्त बिजली योजना पर होने वाला खर्च निकालने के बाद भी राज्य के पास अतिरिक्त संसाधन बच सकते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर
विजय सरकार ने महिलाओं से जुड़े अपराधों को लेकर भी कुछ नए कदमों की घोषणा की है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और अपराध की घटनाओं से निपटने के लिए एक विशेष सुरक्षा बल गठित किया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई और बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
राज्य प्रशासन का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास से जुड़ा मुद्दा भी है।
नशे के खिलाफ अलग अभियान
युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है।
इसी को देखते हुए एक विशेष एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाई गई है। इसका काम नशीले पदार्थों की तस्करी, वितरण और उपयोग पर निगरानी रखना होगा।
सरकार का दावा है कि आने वाले समय में इस मोर्चे पर और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
भ्रष्टाचार की सूचना देने वालों को प्रोत्साहन
विजय सरकार की एक और चर्चा में रहने वाली घोषणा भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों से जुड़ी है।
सरकार ने संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रमाण उपलब्ध कराने वाले नागरिकों को पुरस्कार दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आम लोगों को जवाबदेही की प्रक्रिया में शामिल करना बताया गया है।
हालांकि इस योजना का पूरा ढांचा अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
चुनाव में किए गए बड़े वादे
TVK ने चुनाव प्रचार के दौरान कई ऐसी घोषणाएं की थीं जिन्होंने मतदाताओं का ध्यान खींचा।
इनमें शामिल हैं:
- 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली
- हर वर्ष छह गैस सिलेंडर मुफ्त
- परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,500 रुपये सहायता राशि
- सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा
- गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता और एक तोला सोना
- नवजात बच्चों के लिए विशेष सहायता किट और सोने की अंगूठी
- बेरोजगार युवाओं को 2,000 से 4,000 रुपये तक मासिक भत्ता
- स्कूल जाने वाले बच्चों की माताओं को वार्षिक आर्थिक सहयोग
- प्रति परिवार 25 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा सुविधा
- किसानों के कृषि ऋण माफ करने की योजना
इनमें से बिजली से जुड़ी घोषणा पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। बाकी योजनाओं को आगामी बजट और चरणबद्ध सरकारी कार्यक्रमों के जरिए लागू करने की बात कही जा रही है।
क्या यह मॉडल सफल होगा?
अभी विजय सरकार का कार्यकाल शुरुआती दौर में है। इसलिए किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिर भी पिछले कुछ हफ्तों के फैसलों ने यह संकेत जरूर दिया है कि सरकार खुद को ऐसे प्रशासन के रूप में पेश करना चाहती है जो भ्रष्टाचार पर रोक लगाकर सामाजिक योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का दावा करता है।
आने वाले महीनों में सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि चुनाव के दौरान किए गए बड़े वादों को किस हद तक जमीन पर उतारा जा सकता है। लेकिन इतना तय है कि तमिलनाडु की राजनीति में विजय ने अपने पहले ही महीने में ऐसी बहस छेड़ दी है जिस पर सिर्फ राज्य ही नहीं, पूरे देश की नजर बनी हुई है।