राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने 2 जून को भारत दौरे पर जाने वाले हैं। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब काठमांडू और नई दिल्ली के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
रवि लामिछाने का यह दोदिवसीय दौरा भारत के विदेश मंत्रालय और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निमंत्रण पर तय हुआ है। राजनीतिक हलकों में इसे नेपाल-भारत संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
लामिछाने 2 जून को काठमांडू से नई दिल्ली रवाना होंगे। उनके साथ उनकी पत्नी, निजी सचिव और रास्वपा के दो सांसद भी भारत जाएंगे। सांसद विपिन कुमार आचार्य और दीपक बोहरा भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।
मोदी से मुलाकात की चर्चा
दिल्ली दौरे के दौरान रवि लामिछाने की भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी मुलाकात की तैयारी चल रही है। हालांकि भारतीय पक्ष की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसके अलावा उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी होने की संभावना बताई जा रही है।
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भी रवि लामिछाने के स्वागत की तैयारी की जा रही है। वहां भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ अलग राजनीतिक बैठक प्रस्तावित है।
नेपाल-भारत रिश्तों पर रहेगा फोकस
सूत्रों के अनुसार इस दौरे में नेपाल-भारत संबंध, क्षेत्रीय सहयोग और दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
नेपाल में नई सरकार बनने के बाद रास्वपा नेतृत्व का यह पहला बड़ा भारत दौरा माना जा रहा है। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब नेपाल-भारत संबंधों में अपेक्षित राजनीतिक सक्रियता नहीं दिखने को लेकर चर्चा बढ़ी हुई है।
Balen Shah के नेतृत्व में नई राजनीतिक परिस्थिति बनने के बाद भारत के साथ संवाद की दिशा को लेकर भी कई तरह की अटकलें चल रही हैं।
इस बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का प्रस्तावित नेपाल दौरा टल चुका है। वहीं नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का भारत दौरा भी आगे नहीं बढ़ पाया था। ऐसे में रवि लामिछाने की यह यात्रा राजनीतिक रूप से और ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अयोध्या जाने का भी कार्यक्रम
दिल्ली कार्यक्रम पूरा करने के बाद रवि लामिछाने के अयोध्या जाने की भी तैयारी है। वहां भाजपा से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा चल रही है।
भारत इससे पहले भी नेपाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को विदेश मंत्रालय के जरिए आमंत्रित करता रहा है। नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउबा और माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल भी पहले इसी तरह भारत दौरे पर जा चुके हैं।