श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हाल के वर्षों में हुए बड़े जनआंदोलनों के बाद अब भारत में भी युवाओं के एक नए डिजिटल अभियान ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम की पहल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस अभियान का नेतृत्व अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय युवा अभिजीत दीपके कर रहे हैं, जो प्रदर्शन से पहले भारत पहुंचने वाले हैं।
दिलचस्प बात यह है कि CJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर मजाक और व्यंग्य के रूप में हुई थी। लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह अभियान बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ने में सफल रहा है।
दावे के मुताबिक, शुरुआत के लगभग 20 दिनों के भीतर ही CJP के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर करोड़ों लोगों की पहुंच बन चुकी है। अभियान से जुड़े लोग इसे भारत के युवाओं की नाराजगी की आवाज बता रहे हैं।
एक शब्द से शुरू हुआ पूरा अभियान
इस पूरे अभियान की जड़ एक ऐसी टिप्पणी में बताई जा रही है, जिसने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी।
बताया जा रहा है कि 15 मई को अदालत में सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर सक्रिय बेरोजगार युवाओं को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसमें “कॉक्रोच” शब्द का इस्तेमाल हुआ। यही शब्द कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
अगले ही दिन अमेरिका में अध्ययन कर रहे अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल अभियान शुरू किया।
शुरुआत में इसे एक मीम और इंटरनेट मजाक के रूप में देखा गया। लेकिन धीरे-धीरे बड़ी संख्या में युवाओं ने खुद को इस अभियान से जोड़ना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर “मैं भी कॉक्रोच हूं” जैसे संदेशों के साथ हजारों पोस्ट सामने आने लगे।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक शब्द की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि वर्षों से जमा हो रही युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बन गया है।
NEET और परीक्षा व्यवस्था पर सवालों ने बढ़ाया गुस्सा
CJP के बढ़ते प्रभाव के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत के युवाओं में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी को माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में NEET, JEE, CBSE समेत कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगातार चर्चा में रहे हैं। लाखों छात्र-छात्राओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
अभियान से जुड़े युवाओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।
CJP की मुख्य मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की न्यायिक जांच और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल हैं।
NEET भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लगभग 22 से 25 लाख विद्यार्थी इसमें शामिल होते हैं। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पेपर लीक के आरोपों ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी मुद्दे को CJP लगातार उठा रही है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी, प्रशासन सतर्क
अभियान के संस्थापक अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने के बाद सीधे जंतर-मंतर जाने की योजना बताई जा रही है।
जंतर-मंतर दिल्ली का बेहद संवेदनशील प्रदर्शन स्थल माना जाता है। यह संसद भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय के अपेक्षाकृत करीब स्थित है। यहां किसी भी बड़े प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता होती है।
हालांकि अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी तक उन्हें औपचारिक अनुमति नहीं मिली है और दिल्ली पहुंचने के बाद प्रशासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इसी वजह से प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है।
अभियान के समर्थकों का कहना है कि उन्हें आशंका है कि प्रशासन सख्ती बरत सकता है। वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की ओर से युवाओं को प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी भी दी जा रही है।
अभिजीत दीपके ने भी सार्वजनिक रूप से यह आशंका जताई है कि उन्हें दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिया जा सकता है।
कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने समर्थकों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा या उग्र गतिविधि से आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा।
बुद्धिजीवियों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन
सोशल मीडिया से शुरू हुए इस अभियान को कुछ चर्चित सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिलने लगा है।
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्वयं को “मानद कॉक्रोच” बताते हुए अभियान का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि वह प्रस्तावित प्रदर्शन में भी शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा अन्ना हजारे, ममता बनर्जी, फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप, अभिनेत्री दिया मिर्जा और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत कई चर्चित नामों ने विभिन्न स्तरों पर इस अभियान के प्रति सहानुभूति या समर्थन जताया है।
यही वजह है कि कुछ सप्ताह पहले तक एक इंटरनेट मीम समझा जाने वाला अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
क्या भारत की राजनीति पर पड़ेगा असर?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन भारतीय राजनीति में कितना बड़ा प्रभाव छोड़ पाएगा।
लेकिन इतना साफ है कि शिक्षा, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गए हैं।
कॉक्रोच जनता पार्टी खुद को किसी पारंपरिक राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज के रूप में पेश कर रही है। दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होना और जमीन पर राजनीतिक ताकत बन जाना दो अलग बातें हैं।
अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है।
देखना होगा कि जंतर-मंतर में प्रस्तावित प्रदर्शन कितना बड़ा रूप लेता है, प्रशासन का रुख क्या रहता है और क्या यह डिजिटल अभियान वास्तव में देशव्यापी युवा आंदोलन में बदल पाता है।