सुदन गुरुङ के फैसले से फिर चर्चा में दरबार हत्याकांड

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नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुङ ने दोबारा गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते ही एक ऐसे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है, जो पिछले दो दशक से ज्यादा समय से देश की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेलियों में गिना जाता है। उन्होंने संकेत दिया है कि वर्ष 2001 में हुए नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड से जुड़ी फाइलों का दोबारा अध्ययन और जांच की जा सकती है।

गुरुङ करीब 48 दिन बाद फिर गृह मंत्रालय लौटे हैं। पदभार ग्रहण करने के दिन उन्होंने चार फैसले सार्वजनिक किए, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान उसी घोषणा ने खींचा, जो दरबार हत्याकांड से जुड़ी थी। यही वजह है कि यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है।

नेपाल के इतिहास की सबसे रहस्यमय घटना

1 जून 2001 (वि.सं. 2058 जेठ 19) की रात नारायणहिटी राजदरबार में आयोजित पारिवारिक भोज के दौरान अचानक गोलीबारी हुई थी। इस घटना में तत्कालीन राजा वीरेन्द्र शाह, रानी ऐश्वर्या, राजकुमारी श्रुति, राजकुमार निराजन सहित राजपरिवार के कई सदस्य मारे गए थे।

कुछ ही मिनटों में हुई इस घटना ने पूरे नेपाल को स्तब्ध कर दिया था। राजशाही के इतिहास में इसे सबसे गंभीर और संवेदनशील घटनाओं में माना जाता है।

घटना के बाद बनाई गई आधिकारिक जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि तत्कालीन युवराज दीपेन्द्र शाह ने पारिवारिक विवाद और निजी तनाव की पृष्ठभूमि में गोलीबारी की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बाद में उन्होंने स्वयं को भी गोली मारी।

आधिकारिक निष्कर्ष के बावजूद खत्म नहीं हुए सवाल

सरकारी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भी नेपाली समाज का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा। पिछले 24 वर्षों में इस घटना को लेकर कई तरह के सवाल, शंकाएं और वैकल्पिक दावे समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

सबसे अधिक चर्चा उस समय के राजपरिवार के सदस्य और बाद में राजा बने ज्ञानेन्द्र शाह को लेकर होती रही है। घटना के समय उनका काठमांडू से बाहर होना, उनके परिवार के कुछ सदस्यों का जीवित बच जाना और उसके बाद उनका सिंहासन पर बैठना कई लोगों की जिज्ञासा का विषय बना रहा।

इसके अलावा दीपेन्द्र को लगी गोली की दिशा, पोस्टमार्टम से जुड़े विवाद, घटनास्थल के प्रबंधन और जांच प्रक्रिया को लेकर भी अलग-अलग बहसें वर्षों से चलती रही हैं।

हालांकि इन सवालों को साबित करने वाला कोई ठोस और आधिकारिक प्रमाण अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

विदेशी भूमिका से जुड़े दावे भी रहे चर्चा में

दरबार हत्याकांड को लेकर कई तरह की अंतरराष्ट्रीय साजिशों की चर्चाएं भी समय-समय पर होती रही हैं। कुछ टिप्पणीकारों और विश्लेषकों ने तत्कालीन भू-राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए विदेशी खुफिया एजेंसियों की संभावित भूमिका पर सवाल उठाए थे।

इसी तरह यह दावा भी कई बार सामने आया कि दीपेन्द्र के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर किसी बाहरी शूटर को घटना में शामिल किया गया था। लेकिन ऐसे किसी भी दावे की पुष्टि करने वाला आधिकारिक जांच निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आया है।

फाइल दोबारा खुली तो बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव

पिछले 24 वर्षों में इस मामले पर कोई नई औपचारिक जांच आगे नहीं बढ़ सकी। यही कारण है कि यह घटना अब भी नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी रहस्यमयी घटनाओं में गिनी जाती है।

गृह मंत्री सुदन गुरुङ की हालिया घोषणा ने उन लोगों में उम्मीद जगाई है, जो लंबे समय से इस मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब चाहते हैं।

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पुनः जांच की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू होती है, तो सरकार को भारी राजनीतिक दबाव, सार्वजनिक बहस और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि गृह मंत्रालय इस घोषणा को आगे किस रूप में ले जाता है और क्या वास्तव में दरबार हत्याकांड से जुड़े दस्तावेजों तथा तथ्यों की फिर से औपचारिक समीक्षा शुरू होती है।

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यह सामग्री AI की सहायता से अनुवादित की गई है, लेकिन प्रकाशन से पूर्व इसकी संपादकीय समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन किया गया है।

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