नौ साल बाद धनुषा के 242 परिवारों को मिला लालपुर्जा
धनुषा के क्षिरेश्वरनाथ नगरपालिका-2 में वर्षों से अपनी जमीन के मालिकाना हक के कागज का इंतजार कर रहे 242 परिवारों को आखिरकार लालपुर्जा मिल गया है। जमीन की नापी करीब नौ साल पहले हो चुकी थी, लेकिन आगे की प्रक्रिया अटकी रहने से इन परिवारों को जग्गाधनी प्रमाण पुर्जा नहीं मिल पाया था।
अब नापी कार्यालय धनुषा ने जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर इन परिवारों के नाम जमीन का प्रमाण पुर्जा जारी किया है। इससे लंबे समय से जमीन पर रह रहे परिवारों का मालिकाना हक औपचारिक रूप से दर्ज हो गया है।
2017 में हो गई थी जमीन की नापी
मामला तत्कालीन रमदैया भवाडी गाविस के वार्ड नंबर 1, 5 और 9 के तहत आने वाले इलाकों का है। यहां ये परिवार स्ववासी के रूप में लंबे समय से घर बनाकर रह रहे थे और जमीन का इस्तेमाल कर रहे थे।
इस क्षेत्र में जमीन की नापी और नक्शे का काम 2074 साल में ही पूरा हो गया था। इसके बावजूद उसके बाद की प्रक्रिया समय पर आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजा यह रहा कि जमीन पर वर्षों से बसे लोगों को मालिकाना हक का आधिकारिक कागज पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
रुकी हुई प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद अब 242 लालपुर्जे बांटे गए हैं।
अब जमीन के कानूनी काम भी होंगे आसान
लालपुर्जा मिलने का असर सिर्फ मालिकाना हक के कागज तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों के पास अब तक जमीन का प्रमाणित दस्तावेज नहीं था, उनके लिए कई जरूरी काम मुश्किल बने हुए थे।
अब जमीन की खरीद-बिक्री और दूसरे कानूनी लेनदेन आसान हो सकेंगे। जरूरत पड़ने पर जमीन को बैंक या वित्तीय संस्था में गिरवी रखकर कर्ज लेने का रास्ता भी खुलेगा।
जमीन के मालिकाना हक को लेकर भविष्य में कोई विवाद होने की स्थिति में भी लालपुर्जा अहम कानूनी दस्तावेज होगा।
धनुषा में पहले भी 4,354 परिवारों को मिला पुर्जा
स्ववासी जमीन दर्ता की प्रक्रिया उन परिवारों के लिए खास मायने रखती है, जो लंबे समय से किसी जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं और उसका भोगचलन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना हक साबित करने वाला प्रमाण नहीं था।
धनुषा में इससे पहले स्ववासी जमीन दर्ता के तहत 4,354 परिवारों को जग्गाधनी प्रमाण पुर्जा दिया जा चुका है। अब क्षिरेश्वरनाथ के 242 और परिवार इस सूची में जुड़ गए हैं।
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