ललितपुर के जेब्रा क्रॉसिंग पर स्मार्ट बैरियर
ललितपुर महानगरपालिका ने सड़क पार करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जावलाखेल चोक पर ‘स्मार्ट सेफ्टी बैरियर’ लगाया है। ट्रैफिक सिग्नल से जुड़ा यह बैरियर लाल बत्ती होते ही बंद हो जाता है और हरी बत्ती जलने पर अपने आप खुलता है।
महानगर का कहना है कि कई लोग लाल बत्ती के दौरान भी जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करने लगते हैं। इससे वाहन चालकों और पैदल यात्रियों, दोनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ता है। नई व्यवस्था इसी लापरवाही को रोकने के लिए शुरू की गई है।
बैरियर जेब्रा क्रॉसिंग के दोनों ओर लगाया गया है। लाल सिग्नल के समय लोग सड़क किनारे ही रुकेंगे। हरी बत्ती होते ही रास्ता खुलेगा और वे सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकेंगे।
फिलहाल इसे परीक्षण के तौर पर जावलाखेल चोक पर लगाया गया है। नतीजे अच्छे रहे तो ललितपुर के दूसरे व्यस्त चौराहों पर भी ऐसे बैरियर लगाए जा सकते हैं।
ट्रैफिक व्यवस्था में तकनीक पर जोर
मेयर चिरिबाबू महर्जन के नेतृत्व में ललितपुर महानगर पिछले कुछ समय से शहरी सेवाओं में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। स्मार्ट बैरियर भी उसी योजना का हिस्सा है।
महानगर और ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से शहर के अलग-अलग हिस्सों में आधुनिक कैमरे भी लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी न होने पर भी नियम तोड़ने वाले वाहन और चालक की पहचान की जा सकती है।
इसका मकसद सिर्फ निगरानी बढ़ाना नहीं है। कोशिश यह भी है कि सड़क पर नियमों का पालन किसी कर्मचारी की मौजूदगी पर निर्भर न रहे।
कई जगह देखा जाता है कि ट्रैफिक पुलिस या नगर पुलिस हटते ही लोग नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा कर देते हैं। सिग्नल तोड़ना और गलत दिशा से गाड़ी चलाना भी आम है।
ऐसे में कैमरे, नंबर प्लेट पहचानने वाली तकनीक और डिजिटल चालान व्यवस्था को एक साथ जोड़ा जाए तो नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है।
दूसरे शहरों के लिए भी उपयोगी मॉडल
ललितपुर में शुरू हुआ यह प्रयोग सिर्फ एक चौराहे तक सीमित रहने वाला कदम नहीं माना जाना चाहिए। काठमांडू घाटी के दूसरे स्थानीय निकाय और देश के व्यस्त शहर भी इस व्यवस्था से सीख सकते हैं।
सड़क प्रबंधन केवल पुलिस की तैनाती से लंबे समय तक नहीं चल सकता। कुछ दिन पहले न्यूरोड क्षेत्र में नगर पुलिस की गैरमौजूदगी के दौरान बेतरतीब पार्किंग देखी गई थी। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि व्यवस्था को व्यक्ति के बजाय मजबूत प्रणाली पर टिकाने की जरूरत है।
अगर नो पार्किंग क्षेत्र में लगे कैमरे वाहन का नंबर अपने आप पहचानें और डिजिटल तरीके से जुर्माना दर्ज हो, तो कार्रवाई के लिए हर जगह नगर पुलिस का खड़ा रहना जरूरी नहीं होगा।
इससे नियम लागू करने में एकरूपता आएगी। लोगों को भी यह साफ संदेश मिलेगा कि निगरानी केवल सामने खड़े कर्मचारी तक सीमित नहीं है।
सुरक्षित सड़क के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी
सड़क अनुशासन बनाने के लिए केवल जुर्माना बढ़ाना या बल प्रयोग करना काफी नहीं है। ऐसी व्यवस्था चाहिए जो हर समय काम करे और सभी पर एक समान लागू हो।
स्थानीय सरकारें अपने विकास बजट का एक हिस्सा डिजिटल ट्रैफिक ढांचे पर खर्च कर सकती हैं। स्मार्ट सिग्नल, निगरानी कैमरे, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान और डिजिटल चालान जैसे उपाय लंबे समय में सड़क प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं।
जावलाखेल में लगाया गया स्मार्ट बैरियर अभी छोटा प्रयोग है। लेकिन इसका नतीजा अच्छा रहा तो पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।
ललितपुर की यह पहल बताती है कि सड़क पर अनुशासन केवल अपील से नहीं आता। लोगों को सुरक्षित व्यवहार की ओर ले जाने वाली मजबूत और भरोसेमंद प्रणाली भी उतनी ही जरूरी है।
ललितपुर महानगरपालिका की इस नई व्यवस्था पर आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में लिखें।
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