इजरायल और लेबनान की सीमा पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि लेबनान की ओर से दागे गए एक रॉकेट को हवा में ही मार गिराया गया। इसके बाद उत्तरी इजरायल के कई इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और लोगों से सतर्क रहने को कहा गया।
पश्चिमी गलील, किर्यात शमोना और आसपास के क्षेत्रों में कुछ समय के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी रहा। सेना का कहना है कि जिस लॉन्चर से रॉकेट दागा गया था, उसे भी निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया।
इस घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय हालात को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच संभावित नए समझौते की चर्चा भी तेज हो गई है।
अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर अटकलें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। हालांकि उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चल रही अटकलों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने भी साफ कहा है कि ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा जिसमें ईरान के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित न हों।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हाल में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
प्रस्तावित समझौते में किन मुद्दों पर चर्चा?
अमेरिकी मीडिया में आई खबरों के अनुसार संभावित समझदारी में कई अहम विषय शामिल हो सकते हैं।
- अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाने का प्रस्ताव
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना
- ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
- तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों को आसान बनाने की संभावना
- ईरान की ओर से परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता
- यूरेनियम संवर्धन और उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम पर नई वार्ता
- मानवीय सहायता और विदेशों में रोकी गई ईरानी संपत्तियों पर चर्चा
दक्षिणी लेबनान में इजरायली अभियान पर यूरोप की चिंता
दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी बढ़ने के बाद कई यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है। ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर नियंत्रण हासिल करने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभियान को आगे बढ़ाने के संकेत दिए थे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस सैन्य विस्तार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। फ्रांस ने हालात पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की पहल भी की है।
ब्रिटेन और जर्मनी ने भी ताजा सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए सभी पक्षों से युद्धविराम का सम्मान करने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है।
क्यों अहम है ब्यूफोर्ट किला?
दक्षिणी लेबनान में स्थित ब्यूफोर्ट किला लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखता है। 12वीं शताब्दी में बने इस किले पर अलग-अलग दौर में कई शक्तियों का नियंत्रण रहा है, जिनमें सलादीन की सेनाएं, ओटोमन शासन, फ्रांसीसी प्रशासन और फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन शामिल हैं।
इजरायल ने 1982 में भी इस किले पर कब्जा किया था। मौजूदा दौर में इसकी वापसी को नेतन्याहू सरकार सैन्य उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
हालांकि कई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य बढ़त से हिज्बुल्लाह से जुड़ी व्यापक चुनौतियों का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार स्थायी शांति के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास भी उतने ही जरूरी हैं।