नेपाल और भारत से जुड़े सीमा विवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर प्रतिनिधि सभा में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली। नेपाली कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री के बयान से ऐसा संदेश गया है मानो नेपाल ने ही पड़ोसी देश की भूमि का अतिक्रमण किया हो, जो राष्ट्रीय हित और देश की छवि के खिलाफ है।
मंगलवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में विशेष समय लेकर बोलते हुए कांग्रेस के सचेतक निश्कल राई ने कहा कि नेपाल ने भारत की किसी भी भूमि पर कब्जा नहीं किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के हालिया बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जाती।
राई का कहना था कि इस मुद्दे का असर केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि और राष्ट्रीय स्वाभिमान से भी जुड़ा हुआ मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के समर्थक सामाजिक मीडिया के जरिए ऐसे दावे और सामग्री फैला रहे हैं जिनसे नेपाल को ही सीमा अतिक्रमण करने वाला देश साबित करने की कोशिश की जा रही है।
सदन में आकर जवाब दें प्रधानमंत्री
कांग्रेस पिछले कई दिनों से इस विषय को लगातार उठा रही है। पार्टी की ओर से मांग की गई है कि प्रधानमंत्री स्वयं संसद में उपस्थित होकर अपने बयान पर स्पष्ट जवाब दें।
निश्कल राई ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की टिप्पणी राष्ट्रीय हित के विपरीत गई है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से आत्मालोचना करनी चाहिए और सदन से माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए।
सभामुख की भूमिका पर भी सवाल
कांग्रेस ने इस मामले में सभामुख की भूमिका पर भी असंतोष जताया है। राई ने कहा कि विवादित टिप्पणी को लेकर सदन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्देश या रुलिंग नहीं दी गई है।
उनके अनुसार संसद की कार्यवाही में दर्ज ऐसे बयान पर आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने सभामुख से इस विषय पर स्पष्ट निर्णय देने की मांग की।
राई ने सीमा सुरक्षा के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद उस टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था जो प्रधानमंत्री ने 17 जेठ को प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते समय की थी। उस दौरान उन्होंने ऐसी बात कही थी जिसका आशय यह निकाला गया कि नेपाल भी भारत की कुछ भूमि का उपयोग कर रहा है।
प्रधानमंत्री के इसी बयान को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध जता रहे हैं। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और प्रधानमंत्री को संसद में जवाब देना चाहिए।