सरकार का निर्देश: 7 दिन में खाली हों जनकपुर के तालाब
जनकपुर के पुराने और धार्मिक महत्व वाले तालाबों की जमीन पर बने अवैध ढांचे हटाने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। सरकारी समिति ने साफ किया है कि तय समय के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।
यह निर्देश राजगुठी के अधीन आने वाले तालाबों और उनके आसपास की जमीन पर कब्जा कर बैठे लोगों और संस्थाओं के लिए जारी किया गया है। कई जगह बिना अनुमति निर्माण कर लंबे समय से जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन तालाबों और डिल क्षेत्रों का जिक्र
सार्वजनिक सूचना में विशहरा पोखरी, दशरथ तालाउ, अर्गजा सर, रत्नसागर पोखरी, मुरली सर, दीर्घिका सर और गोडधोई पोखरी का नाम शामिल है।
गुठी की जमीन के संरक्षण और प्रबंधन के लिए बनी उच्चस्तरीय कार्यदल की रिपोर्ट-2062 को लागू करने वाली समिति ने यह सूचना जारी की है। संबंधित पक्षों से कहा गया है कि वे सात दिन के भीतर खुद ही अपने ढांचे हटाएं और जमीन खाली कर दें।
समयसीमा पूरी होने के बाद भी कब्जा जारी रहा तो प्रशासन प्रचलित कानून के तहत अतिक्रमण हटाएगा। इसके साथ ही कब्जा करने वालों के खिलाफ दूसरी कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।
धार्मिक परंपरा से जुड़ी है तालाबों की पहचान
जनकपुर के ये तालाब सिर्फ जलाशय नहीं हैं। धार्मिक अनुष्ठान, पर्व और स्थानीय जीवन से इनका सीधा रिश्ता है। कई तालाब शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माने जाते हैं।
लेकिन वर्षों से इनके डिल सिकुड़ते गए। कहीं पक्के ढांचे खड़े हो गए तो कहीं आम लोगों का रास्ता बंद होता चला गया। इसी वजह से तालाबों का संरक्षण लंबे समय से स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
सरकार का कहना है कि पुराने आयोगों और कार्यदलों की रिपोर्ट को लागू करते हुए गुठी की जमीन, तालाब और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियां बचाने की कार्रवाई तेज की जा रही है। इस काम में भूमि व्यवस्था और सहकारी क्षेत्र से जुड़े निकायों के साथ संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय भी समन्वय कर रहा है।
अब निगाह इस बात पर है कि सात दिन की समयसीमा खत्म होने के बाद कार्रवाई जमीन पर कितनी सख्ती से दिखाई देती है। स्थानीय लोगों के बीच भी यही सवाल है कि इस बार फैसला लागू होगा या मामला फिर सूचना तक ही सीमित रह जाएगा।
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