बाढ़ से भारी नुकसान के बाद मंत्री श्रेष्ठ ने रद्द किया कोरिया दौरा
भोटेकोशी–त्रिशूली नदी प्रणाली में आई बाढ़ से ऊर्जा ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचने के बाद ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने दक्षिण कोरिया का अपना तय दौरा रद्द कर दिया है। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव का काम जारी है। बिजली व्यवस्था को सामान्य करना भी सरकार के सामने तत्काल चुनौती बन गया है।
मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे समय में राहत और बचाव से जुड़े कामों में समन्वय तथा क्षतिग्रस्त ऊर्जा ढांचे की बहाली पर ध्यान देने के लिए मंत्री श्रेष्ठ ने देश में ही रहने का फैसला किया।
बिजली आपूर्ति सामान्य करने पर जोर
बाढ़ ने ऊर्जा क्षेत्र की कई संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है। अब सबसे पहले वास्तविक क्षति का आकलन किया जाना है। इसके साथ प्रभावित संरचनाओं को दोबारा चालू करने और बाधित बिजली आपूर्ति को व्यवस्थित करने का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
मंत्रालय के सामने तत्काल बहाली के साथ पुनर्निर्माण की भी चुनौती है। जिन इलाकों में बिजली सेवा प्रभावित हुई है, वहां स्थिति सामान्य करने के प्रयासों को प्राथमिकता दी जा रही है।
निजी क्षेत्र की ऊर्जा परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं। मंत्रालय ने प्रभावित परियोजनाओं के प्रवर्तकों और उद्यमियों को जरूरी सहूलियत देने को भी प्राथमिक कामों में रखा है।
सियोल में मुख्य वक्ता के तौर पर जाना था
मंत्री श्रेष्ठ को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में 15 से 17 सितंबर तक आयोजित ‘ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर कोऑपरेशन कॉन्फ्रेंस 2026’ में हिस्सा लेना था। सम्मेलन में उन्हें मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
इस दौरे में नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ समेत एक प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ जाने वाला था। यात्रा को मंत्रिपरिषद ने पिछले साउन 13 को मंजूरी दी थी।
लेकिन दौरे के समय ही देश में आई प्राकृतिक आपदा ने ऊर्जा क्षेत्र के सामने गंभीर स्थिति पैदा कर दी। इसके बाद विदेश यात्रा के बजाय प्रभावित इलाकों में चल रहे काम और ऊर्जा संकट के प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई।
फिलहाल मंत्रालय का ध्यान तीन मोर्चों पर है—खोज और बचाव में जरूरी समन्वय, प्रभावित बिजली सेवा को सामान्य करना और क्षतिग्रस्त ऊर्जा संरचनाओं की बहाली। इसके बाद पुनर्निर्माण और ऊर्जा परियोजनाओं को दोबारा खड़ा करने के काम को तेज किया जाएगा।
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